DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

दीवाली पर औसतन 50 लोग खोते हैं आंखों की रोशनी

देश में दीवाली पर हर साल आतिशबाजी के कारण होने वाली दुर्घटनाओं में सैंकड़ों लोग आंखों की रोशनी खो बैठते हैं और एक हादसा जिंदगी की तमाम दीवालियां अंधेरी कर जाता है। एक अनुमान के अनुसार अकेले दिल्ली में हर साल अनुमानत: 50 लोग आतिशबाजी संबंधी हादसों में अपनी आंखों की रोशनी गंवा बैठते हैं।

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि दीवाली पर जलने की 90 फीसदी दुर्घटनाएं पटाखों के कारण होती हैं और 80 फीसदी मामलों में महिलाएं और बच्चे इसका शिकार होते हैं। 40 फीसदी मामलों में 14 साल से कम उम्र के बच्चे अपनी आंख, हाथ या शरीर का कोई अंग गंवा बैठते हैं। आतिशबाजी के कारण होने वाले हादसों में अधिकतर चोट आंख, चेहरे और हाथों पर लगती हैं।

सर गंगाराम अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र चिकित्सक डा हरबंस लाल ने बताया कि दीवाली पर अकेले दिल्ली में औसतन पांच सौ और पूरे भारत में करीब 25 हजार मामले जलने संबंधी दुर्घटनाओं के आते हैं। इनमें से भी अकेले दिल्ली में हर साल दीवाली पर 50-60 लोग आंखों की रोशनी पूर्ण या आंशिक रूप से गंवा बैठते हैं। उन्होंने बताया कि दीवाली पर पटाखों का शिकार सबसे पहले संबंधित व्यक्ति की आंखें होती हैं। वह बताते हैं कि कई बार मामूली सा पटाखा भी आंख को इस कदर चोट पहुंचाता है कि इंसान जिंदगी भर के लिए अपनी आंखों से हाथ धो बैठता है।

दीवाली पर ऐसे हादसों के संबंध में जनता को जागरूक करने के मकसद से एक हेल्पलाइन भी शुरू की गयी है। डा लाल ने बताया कि आतिशबाजी से होने वाले हादसे में आंखों का कोर्निया नष्ट होने, आंख की पुतली फटने या कोर्निया पर सफेद निशान पड़ने की घटनायें शामिल हैं। जिससे आंखों की रोशनी जा सकती है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के हादसों से सावधानी बरत कर ही बचा जा सकता है। ऐसे हादसे अधिकतर अनार चलाने से होते हैं, जिसे लोग सर्वाधिक सुरक्षित आतिशबाजी मानते हैं।

आतिशबाजी संबंधी हादसों को टालने के लिए डा लाल ने बताया कि परिवार के सभी सदस्य एक जगह एकत्र होकर बारी बारी से पटाखें चलाएं और बच्चों को अकेले कतई पटाखे नहीं चलाने दें। यदि हादसा हो ही जाए तो तुरंत शरीर के प्रभावित अंग को पानी में कुछ समय तक डाले रखें क्योंकि रसायन, पत्थर आदि कोई भी तत्व जिसने शरीर पर चोट पहुंचायी है उसका ताप कम किया जा सके। डा लाल ने बताया कि शरीर के जले हिस्से को तुरंत पानी के नीचे रखने से उसके खतरनाक स्तर तक पहुंचने की आशंका को 90 फीसदी तक कम किया जा सकता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:दीवाली पर औसतन 50 लोग खोते हैं आंखों की रोशनी