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मंदी से उबरे उद्योग, औद्योगिक उत्पादन 10.4 बढ़ा

मंदी से उबरे उद्योग, औद्योगिक उत्पादन 10.4 बढ़ा

औद्योगिक उत्पादन में अगस्त 2009 में 10.4 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है। ये आंकडे देश को सुकून पहुंचाने वाले हैं। खनन, विनिर्माण और विद्युत तीनों प्रमुख क्षेत्रों में अगस्त महीने में पिछले साल के मुकाबले दहाई अंक की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे यह आभास होने लगा है कि औद्योगिक क्षेत्र मंदी के असर से बाहर निकल आया है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के केन्द्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) द्वारा सोमवार को जारी औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आंकडों के मुताबिक अगस्त 2008 के 264.7 के मुकाबले अगस्त 2009 में यह 10.4 प्रतिशत बढ़कर 292.3 अंक हो गया। जुलाई में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक 7.2 प्रतिशत बढा़ था जबकि पिछले साल अगस्त में इसमें 1.7 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई थी।

वैश्विक वित्तीय संकट गहराने के बाद पिछले साल अक्टूबर से ही देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में गिरावट का रुख बना हुआ था।

अक्टूबर 2008 से मार्च 2009 तक लगातार गिरावट में रहने के बाद इस साल अप्रैल से इसमें सुधार हुआ और तब से इसमें लगातार मजबूती आती जा रही है। करीब 23 महीने बाद औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में द्विअंकीय वृद्धि लौटी है। इससे पहले आखिरी बार अक्टूबर 2007 में इसमें द्विअंकीय वृद्धि दर्ज की गई थी।

इस साल अप्रैल से अगस्त तक के पांच महीनों में औद्योगिक उत्पादन की औसत वृद्धि 5.8 प्रतिशत हो गई है जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 4.8 प्रतिशत रही थी। अगस्त महीने में सबसे ज्यादा 12.9 प्रतिशत की वृद्धि खनन क्षेत्र में हुई है। विनिर्माण क्षेत्र में 10.2 प्रतिशत और विद्युत क्षेत्र में 10.6 प्रतिशत की वृद्धि रही। तीनों क्षेत्रों की पांच महीनों की औसत वृद्धि भी पिछले साल के मुकाबले बेहतर हुई है।

खाद्यान्न क्षेत्र की महंगाई से उपभोक्ता अभी भी हलकान है और इस क्षेत्र में गिरावट का रुख जारी है। अगस्त में उद्योगों के ज्यादातर क्षेत्रों में वृद्धि का रुख रहा लेकिन खाद्य उत्पादों में 9.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। जूट तथा वनस्पति धागों से बनने वाले दूसरे कपडों के वर्ग में भी 10.2 प्रतिशत की गिरावट रही। लकडी़ और लकडी़ उत्पादों का तीसरा क्षेत्र है जिसमें अगस्त महीने में गिरावट दर्ज की गई। इन तीन क्षेत्रों को छोड़कर औद्योगिक गतिविधियों के सभी 14 क्षेत्रों के सूचकांक में वृद्धि रही।

सर्वाधिक 21.5 प्रतिशत की वृद्धि रबर, प्लास्टिक, पेट्रोलियम और कोयला उत्पादों के क्षेत्र में हुई। ऊनी, रेशमी और मानव निर्मित कपड़ों की मांग बढ़ने से इनके सूचकांक में 15.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है जबकि पेट्रोलियम उत्पादों को छोड़ बेसिक रसायन, रसायन उत्पादों का समूह सचकांक 14.7 प्रतिशत बढ़ गया। मशीनरी, परिवहन कलपुर्जे और कारखाना गतिविधियों के क्षेत्रों में भी द्विअंकीय वृद्धि रही है।

अगस्त महीने में सबसे ज्यादा वृद्धि टिकाऊ उपभोक्ता सामानों के क्षेत्र में दर्ज की गई। इस समूह का सूचकांक अगस्त में 22.3 प्रतिशत बढा़ है। इसके बाद मध्यवर्ती सामानों के वर्ग में 14.3 प्रतिशत और बुनियादी सामानों की मांग 10 प्रतिशत तक बढी़ है। पूंजीगत सामानों के क्षेत्र में 8.3 प्रतिशत और उपभोक्ता सामानों में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। गैर-टिकाऊ उपभोक्ता सामानों में सबसे कम 3.7 प्रतिशत की ही वृद्धि रही है।

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