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हैंडबिल, स्टिकर की काफी डिमांड

बैनर, पोस्टर, होर्डिंग, स्टिकर और हैंडबिल। चुनावी अखाड़े में उतरने के ये सार सामान हैं। चुनाव आयोग के कड़े निर्देश के बाद हालांकि बैनर, पोस्टर व होर्डिग की डिमांड कम हो गयी है पर कई नए उपाए खोज निकाले गए। हैंडबिल, नकली बैलेट पेपर, वोटर पर्ची, कैलेंडर, प्लानर व टेलीफोन डायरक्टरी आदि की काफी मांग प्रत्याशियों के बीच है। चुनाव आयोग के डंडे के डर के बावजूद इन सामानों पर खर्चा कम नहीं बल्कि बढ़ ही गया है। चुनावी बिगुल बजते ही राजधानी स्थित बैनर, पोस्टर आदि छापने वाले प्रिंटिंग प्रस बिजी हो गए हैं। विभिन्न दलों के चुनाव चिह्न्, प्रमुख नेता, पार्टी आदि के डिजाइन बनाने में डिजाइनर जुट गए हैं।ड्ढr ड्ढr शहर में चुनावी सामान छापने वाली कई प्रिंटिंग प्रस हैं। नया टोला, खजांची रोड, दरियापुर आद में दर्जनों प्रिंटिंग प्रस हैं। लेकिन इसमें कुछ ही चुनावी सामान छापने के स्पेशलिस्ट हैं। कई प्रिंटिंग प्रसों के संचालकों ने बताया कि नेताओं से पैसे वसूलने में पसीने छूट जाते हैं, इसलिए हम इस झंझट में पड़ते ही नहीं हैं। दूसरी ओर शांति प्रिंटिंग प्रस व एयरवेज प्रिंटिंग प्रस राजनीतिक दलों के बीच लोकप्रिय हैं। इनके पास राजद, जदयू, भाजपा, बसपा, सपा सहित कई प्रमुख दलों के प्रत्याशी पहुंचते हैं। झारखंड व यूपी के पूर्वी भाग के प्रत्याशी भी यहां चुनावी सामान छपवाने आते हैं। फिलहाल इन प्रसों की निगाहें भी राजनीतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों के नामों की घोषणा पर टिकी हुई हैं। नामों की घोषणा होते ही इनके पास प्रत्याशियों की भीड़ लगने लगेगी। हालांकि कई ने अभी से विभिन्न दलों के स्टिकर, हैंडबिल व पोस्टर छापने शुरू कर दिये हैं।ड्ढr ड्ढr शांति प्रिंटिंग प्रस के संचालक राजीव रतन सिंह कहते हैं कि यह धंधा कमजोर नहीं हुआ है। दूसरी ओर एयरवेज के बबलू गांधी की मानें तो चुनाव आयोग के कड़े निर्देश के चलते धंधा लगभग खत्म हो गया है। दूसर काम नहीं करं तो गुजारा मुश्किल हो जाएगा। राजीव जी के मुताबिक लोकसभा का एक प्रत्याशी कम से कम पोस्टर, बैनर आदि छपवाने पर तीन लाख रुपए तक खर्च करता है। हैंडबिल पांच से दस लाख तक छपवाता है। अब उन्होंने प्लानर भी निकाला है। बुकलेट साइज के इस प्लानर की काफी मांग है।ं

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  • Web Title: हैंडबिल, स्टिकर की काफी डिमांड