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सहज अभिनय के पर्याय थे अशोक कुमार

सहज अभिनय के पर्याय थे अशोक कुमार

हिन्दी फिल्मों के आंरभिक दौर के नायकों में अशोक कुमार एक ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने प्रचलित पारसी थियेटर के संस्कारों को ताक पर रखते हुए अपने सहज अभिनय के दम पर स्टारडम खड़ा किया और कभी अपने को किसी छवि से बंधने नहीं दिया।

दिलचस्प है कि शुरुआती दौर में फिल्म जगत में मौजूद रहने के बावजूद अशोक कुमार पर्दे पर अभिनय के पक्ष में नहीं थे। इसीलिए जब उन्हें जीवन नैया फिल्म में अभिनय का मौका मिला तो उन्होंने बहुत ही बेमन से इसमें काम शुरू किया। दरअसल अशोक कुमार की रुचि फिल्म के तकनीकी पक्ष में थी और वह इसी में सफलता हासिल करना चाहते थे।

किसी काम को हाथ में लेने के बाद उसे पूरी तल्लीनता से करना अशोक कुमार की फितरत थी। इसी वजह से जब उन पर अभिनय की जिम्मेदारी आई तो उन्होंने इसे भी पूरी गंभीरता से लिया। वह अभिनय में इतनी जल्दी रच बस गए कि लगा मानों यह उनका जन्मजात पेशा था। इस बात का प्रमाण उनकी शुरुआती फिल्म अछूत कन्या थी।

इसमें अशोक कुमार अपने दौर की प्रख्यात अभिनेत्री देविका रानी के साथ काम कर रहे थे, लेकिन उनके अभिनय को देखकर कहीं भी यह नहीं लगता था कि वह कोई नौसिखिया अभिनेता हों। इसके बाद अशोक कुमार की देविका रानी के साथ इज्जत, सावित्री और निर्मला फिल्में आई। बाद में अशोक कुमार की सुपर हिट फिल्म मैं बन का पंछी आई जिसका एक गाना आज भी उनकी आवाज में सुनने पर मधुर लगता है।

एक स्टार के रूप में अशोक कुमार की छवि 1943 में आई किस्मत फिल्म से बनी। पर्दे पर सिगरेट का धुंआ उड़ाते अशोक कुमार ने राम की छवि वाले नायक के उस दौर में इस फिल्म के जरिए एंटी हीरो के पात्र को निभाने का जोखिम उठाया। यह जोखिम उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ और इस फिल्म ने सफलता के कई कीर्तिमान बनाए। इसके बाद 1949 में मधुबाला के साथ आई महल भी काफी सफल साबित हुई। अपने दौर की अन्य अभिनेत्रियों के साथ-साथ अशोक कुमार ने मीना कुमारी के साथ भी कई फिल्मों में अभिनय किया, जिनमें पाकीजा, बहू बेगम, एक ही रास्ता, बंदिश, आरती आदि शामिल हैं।

बिहार के भागलपुर में 13 अक्टूबर 1911 में जन्मे 'दादा मुनि' अशोक कुमार ने कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कालेज से पढ़ाई की थी। उनके पिता कुंजलाल गांगुली मध्य प्रदेश के खंडवा में वकील थे। अशोक कुमार के दो छोटे भाई अनूप कुमार और किशोर कुमार भी बाद में फिल्मों में आए। दरअसल इन दोनों को फिल्मों में आने की प्रेरणा भी अशोक कुमार से ही मिली।

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