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नेशनल नॉलेज मिशन में इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर

नेशनल नॉलेज मिशन के तहत अब उच्च शिक्षा में बदलाव की तैयारी है। पहला टारगेट कॉलेजों को इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराना है, जिससे कॉलेज देश विदेश के अन्य संस्थानों से कनेक्ट हो सके। कानपुर मण्डल में 49 संस्थानों का चयन किया जा चुका है। अब मिशन के तहत हर जिले में मॉडल डिग्री कॉलेज खोलने की तैयारी की जा रही है। पंचायत स्तर पर भी उच्च शिक्षा के लिए प्रोग्राम तैयार किया जा रहा है।

अरबों रुपए की नेशनल नॉलेज मिशन योजना में हायर एजूकेशन के अलावा स्कूल स्तर पर भी ध्यान दिया जाएगा। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों को कमीशन की रिपोर्ट भेजी है, जिसके माध्यम से यह बताया गया है कि किस तरह डिग्री कॉलेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जा सकता है, जिससे स्तर में सुधार हो सके।

इसमें खास बात यह है कि केवल ग्रांट इन ऐड के सहारे उच्च शिक्षा के स्तर को ऊंचा करने की बात नहीं है, इसमें सेल्फ फाइनेन्स कॉलेजों पर भी ध्यान दिया गया है। मिशन में रिसर्च पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। इसके लिए रिसर्च मिशन का गठन किया जाएगा। पंचायतों के स्तर पर ज्ञान केन्द्र खोले जाएंगे। यहां से ग्रामीण अंचल के लोगों को कृषि समेत अन्य विषयों की जानकारी मिल सकेगी।

ई गवर्नेन्स पर भी जोर दिया गया है। स्कूल एजूकेशन और वोकेशनल कोर्स भी बढ़ाए जाएंगे। मिशन के तहत ही देश में नए आईआईटी और आईआईएम खोलने का निर्णय लिया गया था। नेशनल नॉलेज नेटवर्क से जुड़ने के बाद कानपुर मण्डल के 49 संस्थानों को बेहद सस्ती ब्रॉडबैण्ड सेवा उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके लिए बीएसएनएल के साथ दस साल का समझौता हुआ है। इसमें केवल 30 फीसद राशि ही कॉलेजों को देनी है, जबकि शेष राशि सरकार देगी। सीडीसी निदेशक डॉ. सीपी सिंह का कहना है कि नेशनल नॉलेज मिशन का अध्ययन किया जा रहा है। इसके अन्तर्गत फैसले सरकार को लेने होते हैं।

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