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बोर्ड के अधिवेशन में पेश होगा प्रस्ताव

ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाई जाएगी। बोर्ड में 30 फीसदी सदस्य महिलाएं बनाई जाएंगी। इसका एक प्रस्ताव अगले साल मार्च में बोर्ड के प्रस्तावित अधिवेशन में रखा जाएगा। इसका ऐलान बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना कल्बे सादिक ने रविवार को क्रिश्चियन कॉलेज के मैदान में आयोजित मुस्लिम महिला आंदोलन के तीसरे राष्ट्रीय अधिवेशन में किया।

उन्होंने कहा कि जब तक बोर्ड में महिला सदस्यों की संख्या नहीं बढ़ेगी तब तक उनकी बेहतरी के लिए कोई पहल नहीं हो सकेगी। उन्होंने अधिवेशन में यह बात खुले दिल स्वीकार की कि मौलवी व मुस्लिम समाज ने महिलाओं को उचित सम्मान नहीं दिया। उन्हें जो हक मिलने चाहिए उनसे उन्हें दूर रखा गया। वे यह भूल जाते हैं कि कुर्आन में महिलाओं का दर्जा पुरूषों से कहीं कम नहीं रखा गया।

अधिवेशन में उन्होंने कहा कि सभी समस्याओं का समाधान मात्र इल्म से हो सकता है। मुस्लिम कन्याओं की शिक्षा के लिए हर माँ-बाप को सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए। इसके पहले यही अपील योजना आयोग की तालीमी कमेटी की सदस्य डॉ.साबिरा हबीब भी ने की।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाएं कुछ हद अपने पिछड़ेपन के लिए खुद ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ सरकार को कोसने से काम नहीं होगा। मुसलमानों के लिए करोड़ों की योजनाएं सिर्फ जानकारी न होने के कारण कामयाब नहीं हो रही हैं। मुस्लिम महिलाओं को लक्षद्वीप और पांडेचेरी से सबक लेना चाहिए।

यहां मुस्लिम महिलाओं की साक्षरता 100 प्रतिशत है। ऐसे में यह बेहद जरूरी है कि मुस्लिम लड़कियों की साक्षरता दर को बढ़ाया जाए। अधिवेशन में वरिष्ठ समाजसेविका नसीमा इम्तेदार ने डॉ.कल्बे सादिक की घोषणा का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं की स्थिति बहुत दयनीय है। बीपीएल कार्ड व मतदाता सूची में नाम का अभाव में मुस्लिम महिलाओं के पास सरकारी जरूरतों के पहुंचने के बारे में सोचना बेमानी होगा।

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