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मनोरंजन कर नीति में संशोधन का मुद्दा गर्माया

प्रदेश सरकार की नई मनोरंजन कर नीति से असंतुष्ट राज्य के सिंगिल स्क्रीन सिनेमाहॉल मालिकों का एक प्रतिनिधि मण्डल सोमवार को मनोरंजन कर आयुक्त मुक्तिमोहन मिश्र से मुलाकात करेंगे। यूपी सिनेमा एक्जीबिटर्स फेडरेशन के कार्यकारी महासचिव और पूर्व उपाध्यक्ष एल.पी.अग्रवाल इस प्रतिनिधि मण्डल में शामिल रहेंगे।

संगठन की प्रदेश सरकार से यही मांग है कि या तो मनोरंजन कर नीति में विगत 4 सितम्बर की अधिसूचना से किए गए बदलाव वापस लिए जाएं या फिर प्रदेश में मनोरंजन कर पूरी तरह खत्म कर दिया जाए। अगर सरकार से वार्ता के जरिए मसले का हल नहीं निकला तो फिर यूपी सिनेमा एक्जीबिटर्स फेडरेशन राज्य के सारे सिनेमाहॉलों को बंद करके उनकी चाभियां प्रदेश सरकार को सौंपने पर मजबूर होगा।

उन्होंने बताया कि उनकी जानकारी में यह भी आया है, प्रदेश सरकार एक प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमण्डल में लाने की तैयारी में है जिसमें राज्य के बंद पड़े या बंद के कगार पर आ चुके सिनेमाहॉलों को एक राहत पैकेज दिया जाएगा। इस पैकेज के मुताबिक ऐसे सिनेमाहॉल मालिकों को पूरा सिनेमातोड़ कर 125 सीटों की न्यूनतम क्षमता वाला एक सिनेमाहॉल अनिवार्य रूप से बनाने को कहा जाएगा और बाकी जगह में वह कामर्शियल कॉम्पलेक्स आदि बनवा सकते हैं। मगर एसोसिएशन चाहता है सिनेमाहॉलों को तोड़कर फिर उस जगह नया सिनेमाहॉल खोलने की बाध्यता न हो। बल्कि वहां कोई भी कारोबार करने की इजाजत दी जाए।

केबल ऑपरेटरों का संगठन यू.पी.केबल उद्योग संघ भी मंगलवार को मनोरंजन कर मंत्री नकुल दुबे से मुलाकात की तैयारी में है। संघ के अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह के अनुसार केबल ऑपरेटरों की हड़ताल की तैयारी को भांप प्रदेश सरकार ने एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को तैनात किया है, जो सारे मुद्दों पर ऑपरेटरों से बात करके उसकी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपेगा

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