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वोटरों की फजीहत : सभी ने आयोग को जिम्मेदार माना

भाजपा ने मतदान के दौरान हुई वोटरों की फजीहत का ठीकरा चुनाव आयोग पर फोड़ा है। एक राजनीतिक दल की हैसियत से वोटरों को मतदान केन्द्र तक पहुंचाने की अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए इसके प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह ने कहा है कि मतदाताओं को बूथ की राह दिखाना चुनाव आयोग की ड्यूटी है न कि हमारी। लोकतांत्रिक व्यवस्था का अंग होने के नाते हमारी जिम्मेदारी आयोग के एक सहयोगी भर की है। हमसे जितना संभव था हमने सहयोग किया। आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण के मौके पर हर बूथ पर हमार कार्यकर्ता मौजूद थे और आयोग के कर्मियों को हर तरह की मदद की। इसके बावजूद हमारी क्षमता सरकार या आयोग की तुलना में सीमित है। श्री सिंह ने कहा कि बूथ की जानकारी की बाबत पर्ची काटना हमारा नहीं बल्कि यह आयोग का काम है। उसे अपनी इस जिम्मेदारी का पालन करना चाहिए। राजनीतिक दल तो वोटरों को आकर्षित करने के लिए अपनी तरफ से पर्ची बंटवाते हैं।ड्ढr ड्ढr वोटरों को सूचीबद्ध करने में रहा विफलड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। राजद ने कहा कि सभी मतदाताओं को सूचीबद्ध करने का दायित्व आयोग का है और उसकी स्थानीय मशीनरी इसे निभाने में सफल नहीं हुई। इसके कारण वोटरों को मतदान करने से वंचित होना पड़ा। आयोग को इसे चैलेंज के रूप लेना होगा तभी सभी वोटर मतदान कर पायेंगे। उन्होंने कहा कि गरीबों का नाम नहीं जुड़ने से वे वोट देने से वंचित हो गये। राजद ने मतदाता पुनरीक्षण के समय सभी बूथों पर अपने एजेंट तैनात किये थे। बावजूद आयोग द्वारा अपना दायित्व निर्वहन नहीं करने के कारण मतदाताओं को मतदान के दिन बूथ दर बूथ घूमना पड़ा। आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वे पटना से सांसद है, इसके बावजूद मतदाता सूची में उनका फोटो गायब है। इससे अंदाज लगाया जा सकता है कि आयोग की मशीनरी कितनी कारगर है। कई जगहों पर मतदाताओं का फोटो खींचा गया पर उन्हें फोटो पहचान पत्र नहीं दिया गया। अब ऐसी स्थिति में राजनीतिक दल कैसे जिम्मेवार हो सकते हैं। आयोग को अभियान के रूप में अपनी जिम्मेवारी निभानी होगी।ड्ढr ड्ढr बूथ एजेंट नियुक्ित में दिया कम समयड्ढr पटना (हि.ब्यू.)। कांग्रस ने कहा है कि मतदान केन्द्रों पर वोटरों की फजीहत के लिए चुनाव आयोग की मशीनरी जिम्मेवार है। चुनाव से जुड़े कर्मियों ने कोताही बरती जिसके कारण जिसका फोटो पहचान पत्र बना उसका वोटर लिस्ट से नाम गायब हो गया तो एक ही परिवार के लोगों की सूची अलग-अलग बूथों पर सूचीबद्ध कर दी गई। हालांकि उन्होंने कहा कि इसके लिए कुछ हद तक राजनीतिक पार्टियां भी जिम्मेवार है। कांग्रस मतदाता सूची पुनरीक्षण के समय चुनाव आयोग के निर्देशों के बावजूद सभी बूथों पर अपने एजेंट नियुक्त नहीं कर सकी। इसके लिए आयोग का दिशा निर्देश आड़े आया। आयोग ने बूथ एजेंट नियुक्त करने के लिए काफी कम समय दिया जिसके कारण सभी जगहों पर एजेंटों की नियुक्ित नहीं हो सकी। बावजूद यह कहकर कि पार्टियां जिम्मेवार है आयोग की मशीनरी अपनी जिम्मेवारियों से बच नहीं सकती। पूर प्रदेश की 10 फीसदी आबादी भी दलों से सीधी तौर पर जुड़ी हुई नहीं है। ऐसे में सभी मतदाताओं को सूचीबद्ध करना आयोग का ही दायित्व है और उसे ही यह काम करना होगा।

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