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पी-1 के चक्कर में पड़ रहे लेने के देने

पोलियो का पी-3 वायरस की अनदेखी डब्ल्यूएचओ और स्वास्थ्य विभाग को भारी पड़ रही है। पी-1 वायरस को खतरनाक मानकर दो साल से इसकी वैक्सीन बच्चों को पिलाई जा रही है। पी-1 पर तो पूरी तरह से काबू नहीं हो पाया। उल्टे पी-3 वायरस का कोहराम जारी है। हालात बेकाबू होते देखकर अब पी-3 वैक्सीन बच्चों को पिलाई जा रही है।


पोलियो मिटाने को अब तक अरबों रुपया पानी की तरह बहाया जा चुका है। 15 साल से ताबड़तोड़ पोलियो राउंड चलाए जा रहे हैं। पर पोलियो वायरस इतना ढीठ हो चुका है कि हर वैक्सीन उस पर बेअसर साबित हो रही है। डब्ल्यूएचओ और स्वास्थ्य विभाग पोलियो के पी-1 वायरस को सबसे खतरनाक मानते हैं। जबकि पी-3 को कमजोर। पी-2 वायरस का खात्मा हो चुका है। लेकिन पी-3 को कमजोर मानने की प्रवृत्ति हर साल सैकड़ों बच्चों को विकलांग बना रही है। पी-1 को खतरनाक मानकर पिछले दो साल तक इसकी वैक्सीन बच्चों को पिलाई गई। पर यह वायरस अभी तक खत्म नहीं हुआ। इस दौरान पी-3 वायरस ने अपना कहर बरपाया और अधिकांश पोलियो केस पी-3 के मिल रहे हैं। जबकि इनकी तादाद बढ़ती गई तो अचानक अक्तूबर में चले पोलियो राउंड में पी-3 वैक्सीन बच्चों को पिलाई जाने लगी। पर इस दौरान बहुत से बच्चों पी-3 वायरस के कारण अपने पैरों पर खड़े होने लायक नहीं रहे। ताजा रिपोर्ट में भी देश में मिलें 36 केसों में से 31 पी-3 वायरस के हैं।

पोलियो केसों की ताजा रिपोर्ट
देश में कुल पोलियो केस 36
पी-1 के केस 5, पी-3 के केस 31
यूपी में पी-1 के केस 2, पी-3 के केस 28
बिहार में पी-1 के केस 2, पी-3 के केस 3

जड़ से मिटाएंगे पोलियो : सीएमओ
सीएमओ डॉ. एके धवन का कहना है कि पी-3 वायरस कमजोर वायरस है। पहले पी-1 को नष्ट करने के लिए अभियान चलाया गया था। अब पी-3 दवा पिलाई जा रही है। पोलियो वायरस को जल्दी ही जड़ से मिटा दिया जाएगा।

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