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विकास के नाम पर वोट मांग रहे सुरजेवाला

नरवाना के बाद अब इस पंजाबी बहुल विधान सभाई क्षेत्र में भी बिजली मंत्री और कांग्रेस उम्मीदवार रणदीप सिंह सुरजेवाला अपना असर दिखा रहे हैं। कम उम्र में काफी कुछ पा चुके और इनेलो प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला जैसे नेता से लोहा ले चुके रणदीप सुरजेवाला को यहां से पहली बार उम्मीदवार बनने के बावजूद पहचान का संकट नहीं है। वैसे उनके पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला पिछली दफा यहीं से विधायक थे। पिता की विरासत पाने के लिए रणदीप विकास कार्यो के नाम पर वोट मांग रहे हैं।

रणदीप युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2005 में जब भजन लाल पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष थे तो रणदीप उनके साथ कार्यकारी अध्यक्ष थे। इसके अलावा नरवाना हलके से हैवीवेट ओम प्रकाश चौटाला के खिलाफ चार चुनाव लड़ कर दो में जीत भी हासिल कर चुके हैं। कहने का अर्थ है कि उनका प्रोफाइल काफी अच्छा है। प्रदेश में ऐसे बहुत ही कम लोग होंगे जो उनको जानते न हों। व्यवहार से मिलनसार और पेशे से वकील होने के कारण रणदीप लोगों तक अपनी बात को तर्क के साथ पहुंचाना जानते हैं।

सुरजेवाला के मुकाबले हरियाणा जनहित कांग्रेस के उम्मीदवार सुरेन्द्र मदान हालांकि भजन लाल मंत्रिमण्डल में मंत्री रह चुके हैं, लेकिन उन्हें अपने आप को साबित करना पड़ रहा है। वजह यह है कि 1996 के बाद वे राजनीति में ऐसे किसी शिखर पर नहीं रहे कि लोग उन्हें याद रखते। इनेलो प्रत्याशी कैलाश भगत पिछले चुनाव में भी मैदान में थे और 38 हज़ार वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे। जहां तक भाजपा का सवाल है उसके उम्मीदवार को तो बहुत से लोग जानते तक नहीं है।

विपक्षी प्रत्याशी बिजली-पानी, कानून और व्यवस्था, मंहगाई, सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार, ज़मीन के सौदों में गड़बड़ी, क्षेत्रवाद और बेरोज़गारी के मुद्दों पर सत्तारूढ़ दल को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सुरजेवाला अपने विभाग और सरकार के विकास कामों के बल पर वोट मांग रहे हैं। उनकी रणनीति का एक अहम हिस्सा यह देखने को मिला कि वे अपने भाषणों में विपक्षी उम्मीदवारों का नाम नहीं लेते।

सुरजेवाला मूलत: अपनी सरकार के विकास के कामों के नाम पर वोट मांग रहे हैं। वे लोगों से कहते हैं कि आधारभूत विकास के लिए अब तक उनकी सरकार 1500 करोड़ रुपयों का निवेश कर चुकी है। यदि वे जीते तो और अधिक विकास किया जाएगा। उनका दावा है कि विकास के जितने काम पिछले साढ़े चार वर्षो में हुए उतने प्रदेश बनने के बाद से लेकर आज तक नहीं हुए। इन सारी बातों से अलग रणदीप का कद, साफ छवि, मिलनसार व्यवहार उनको काफी फायदा पहुंचा रहा है।

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