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आपदा प्रबंधन में फिर खुली प्रशासन की कलई

भूकंप के लिहाज से संवेदनशील जोन में आने वाले शहर फरीदाबाद में आपदा प्रबंधन के नाम पर कुछ नहीं है। इमारत ढहने के तीसरे हादसे में इस बंदोबस्त को लेकर प्रशासन की फिर कलई खुल गई। चौक से बुलाए मजदूर व भाड़े की क्रेनों को लेकर अफसर राहत कार्य के लिए मौके पर जा खड़े हुए। खुदाई का सदियों पुराना उपकरण ‘कुदाली’ से यहां काम लिया गया।


औद्योगिक सेक्टर-24 के प्लॉट-222 में ढही निर्माणधीन इमारत से अफरातफरी मच गई। चुनावी डयूटी में लगा पुलिस अमला मौके पर पहुंचा। फिर नगर निगम प्रशासन भी पहुंच गया। घायल मजदूर जो बाहर थे, उनको एंबुलेंस से अस्पताल भेज दिया गया। मलबे दबे मजदूरों की संख्या के कयास लगाया जाने लगा। एक-दो घंटे तक यही मंथन चलता रहा। असहाय निगम अधिकारी व फैक्ट्री मालिक की नजर मजदूरों पर पड़ी। कुदाली देकर उनको मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए लगा दिया गया। तीन घंटे लगाकर खुदाई करने वाले मजदूर भी थक का चूर हो गए। सीमेंट मिश्रित रोडी-स्टोनडस्ट एक हजार से ज्यादा फुट सामग्री को मैन पावर से हटाया गया। मजदूरों से कई गुना ज्यादा पुलिस कर्मी, निगम के अफसर व उद्योग मालिक व परिवारिक सदस्यों की संख्या थी। थक चुके मजदूरों से कुदाली लेने की बजाय तमाशबीन ठंडा मिनरल वाटर पी रहे थे। उद्योग मालिक तो कमरे में बैठे थे। गनीमत है निगमायुक्त सीआर राणा मौके पर कई घंटे खड़े रहे। बाहर अग्निशमन की एक गाड़ी, एक एंबुलेंस खड़ी थी। इससे ज्यादा यहां आने वाले लोगों की गाड़ियों की संख्या थी। इस नजारे ने सूबे में सबसे ज्यादा रेवेन्यू देने वाले दो बड़े शहरों में एक फरीदाबाद के आपदा प्रबंधन की कलई खोल दी। बिल्डिंग के अचनाक ढहने से बचाव कार्य शुरु करने में पुलिस-प्रशासन के घंटों हाथ-पांव फूले रहे। घटना ने यह भी जाहिर कर दिया कि ऐसी स्थितियों से निपटने को दिल्ली से लगा यह शहर बिल्कुल तैयार नहीं।


----आपदा से बचाव का हाल
दमकल केंद्र: पांच
दमकल गाड़ियां: सात
-एस्कोर्ट, एयर फोर्स में एक-एक दमकल गाड़ी
-दमक ल केंद्र में ही इनकी गाड़ियों में पानी भरने की सुविध
-जिले की कुल आबादी: 16 लाख
सरकारी एंबुलेंस: 5
गैर सरकारी एंबुलेंस: 17
-एमर्जेंसी के फोन नंबर : 101, 102। मिलाने पर नहीं मिलते
नागरिक सुरक्षा सेल: आपदा से निपटने का कोई सामान नहीं

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