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प्रदेश में बिजली की भारी कमी

प्रदेश सरकार की तमाम कवायद के बावजूद बीते दो वर्ष में बिजली किल्लत में जबरदस्त इजाफा हुआ है। बिजली की मांग में वृद्धि और आपूर्ति में कमी इसकी मुख्य वजह रही है। चालू वित्त वर्ष की प्रथम दो तिमाही (अप्रैल से सितम्बर, 09) के दौरान यह कमी बढ़कर 22.4 प्रतिशत तक जा पहुंची है जो सिक्कम-गोआ जैसे छोटे राज्यों को छोड़ देश में सर्वाधिक रही।

विद्युत विभाग के सूत्रों के मुताबिक अप्रैल से सितम्बर के दौरान प्रदेश में बिजली की मांग 2007-08 की इसी अवधि की मांग 31270 मिलियन यूनिट से बढ़कर 39262 मिलियन यूनिट तक पहुंच गयी। तमाम कोशिशों व ग्रिड से भारी ओवर विदड्राल के बावजूद इस दौरान बिजली की उपलब्धता महज 30465 मिलियन यूनिट तक ही हो सकी। वर्ष 2007-08 में मांग-आपूर्ति में 2980 मिलियन यूनिट का अंतर चालू वित्तीय वर्ष के सितम्बर माह तक 8797 मिलियन यूनिट तक जा पहुंचा।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में बिजली की मांग अप्रैल से सितंबर के दौरान प्रतिवर्ष लगभग छह हजार मिलियन यूनिट बढ़ रही है वहीं विभिन्न ट्रेडिंग कंपनियों से बिजली खरीद के सौदे करने के बावजूद विद्युत विभाग तीन हजार मिलियन यूनिट बिजली भी अतिरिक्त उपलब्ध नहीं करा पा रहा।

बीता माह सितंबर भी प्रदेशवासियों के लिए खासी किल्लत वाला रहा जिसमें बिजली की मांग में 2007-08 के इन छह महीनों के मुकाबले जहां 1057 मिलियन यूनिट से अधिक का इजाफा हुआ जबकि आपूर्ति में महज 388 मिलियन यूनिट बढ़ोतरी की जा सकी और बिजली की किल्लत 13.5 प्रतिशत से बढ़कर 22 प्रतिशत के रिकार्ड स्तर पर जा पहुंची है। पीक आवर्स में भी बिजली की मांग इस दौरान साढ़े दस हजार मेगावाट से ऊपर रहना बिजली किल्लत बढ़ने के साफ संकेत दे रहा है।

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