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अमीर खुसरो को 737वीं जयंती पर याद किया गया

साहित्य और संगीत की दुनिया में अमिट छाप छोड़ने वाले अमीर खुसरो की 737वीं जयंती पर राजधानी लखनऊ में याद किया गया।

राजधानी विश्वेश्वरैया सभागार में राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा आयोजित हजरत अमीर खुसरो स्मृति समारोह में उर्दू के प्रसिद्ध समालोचक एवं साहित्य अकादमी के पूर्व अध्यक्ष प्रो गोपीचंद नारंग ने मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अमीर खुसरो ने एक लाख से ज्यादा फारसी शेर गढ़े। हिन्दी भाषा में भी उनका बेशुमार कलाम मौजूद है। वह फारसी के साथ अन्य भारतीय भाषाओं में भी दक्ष थे।

प्रो नारंग ने कहा कि अमीर खुसरो का कहना था कि उनके मुख से शेर ऐसे निकलते हैं जैसे कोई झरना बह रहा हो।

सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एवं पूर्व कृषि उत्पादन आयुक्त अनीस अंसारी ने कहा कि अमरी खुसरो ने इस देश को एक सूत्र में बांधने का काम किया और इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीयता की भावना को बलवती बनाया। कई बादशाहों के दरबारों से सम्बन्ध रखने के बावजूद देश की जनता से उनका गहरा सम्बन्ध था। उनकी अधिकांश शायरी आम जन की भाषा में है। यही कारण है कि उनकी शायरी में देश प्रेम कूटकूट कर भरा है।

उन्होंने कहा कि सूफियों ने भारत को एक रखने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि खुसरो संगीत की दुनिया के भी बेताज बादशाह थे।

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