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लद्दाख में ऑक्सीजन की मात्रा 50 फीसदी बढ़ी

लद्दाख में ऑक्सीजन की मात्रा 50 फीसदी बढ़ी

पहली बार लद्दाख आने वाला कोई भी व्यक्ति ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण सांस में परेशानी महससू कर सकता है। परंतु एक सफल वृक्षारोपण कार्यक्रम से वहां के पर्यावरण में बदलाव आया है।

वृक्षारोपण कार्यक्रम की योजना बनाने वाले डिफेंस इंस्टीटय़ूट ऑफ हाई अल्टीटय़ूड रिसर्च (डीआईएचएआर) के वैज्ञानिकों के अनुसार करीब 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित लद्दाख में ऑक्सीजन का स्तर 50 प्रतिशत बढ़ा है और वर्षा में भी वृद्धि हुई है।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के मुख्य नियंत्रक (अनुसंधान और विकास) डब्ल्यू. सेल्वामूर्ति ने कहा, ‘‘वातावरण में ऑक्सीजन की मात्र में 50 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। गेहूं की खेती, बागवानी और ग्रीनहाउसों से भी ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ी है।’’

लद्दाख का अधिकांश हिस्सा ठंडा रेगिस्तान है और वहां कोई वनस्पति नहीं है। इससे मैदानी इलाकों की तुलना में वहां आक्सीजन कम है। सेल्वामूर्ति ने कहा कि डीआईएचएआर द्वारा लगाए गए पेड़ काफी अच्छी तरह से बढ़ रहे हैं।

डीआईएचएआर हर वर्ष करीब 20,000 वृक्ष स्थानीय लोगों को देता है, लेकिन शून्य से 50 डिग्री सेल्सियस कम तापमान वाली कठोर जलवायु के कारण उनके बचने की दर बहुत कम है। डीआईएचएआर अब लेह की बेरी की व्यापक पैमाने पर खेती कराने की योजना बना रही है। लद्दाख के करीब 11,500 हैक्टेयर क्षेत्र में इस बेरी की झाड़ियां फैली हैं। लद्दाख में सब्जियों की कुल आवश्यकता का केवल 58 प्रतिशत उत्पादन होता है और शेष का आयात किया जाता है।

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