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मंहगाई,बाढ़,सूखे को लेकर माकपा पोलितब्यूरो की बैठक शुरू

मंहगाई,बाढ़,सूखे को लेकर माकपा पोलितब्यूरो की बैठक शुरू

देश में बेतहाशा बढ़ रही मंहगाई, बाढ़ और सूखे से उत्पन्न स्थिति, बेरोजगारी और खाद्य सुरक्षा जैसे मसलों पर विचार करने के लिए माकपा पोलितब्यूरो की बैठक हुई।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि पोलित ब्यूरो पश्चिम बंगाल में माकपा नेताओं और कैडरों की माओवादियों द्वारा की गई हत्याओं से उत्पन्न हालात पर भी बातचीत करेगा।

सूत्रों के मुताबिक माकपा पोलितब्यूरो द्वारा सांगठनिक मसलों से निपटने के लिए सुधार दस्तावेज को भी अंतिम रूप दिये जाने की संभावना है। दस्तावेज में सुझाये गये सुधारों को जिस हद तक लागू किया जाएगा, वह पश्चिम बंगाल और केरल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण होगा।

सूत्रों ने बताया कि प्रस्तावित दस्तावेज में सांगठनिक खामियों को दुरूस्त करने के कदम शामिल होंगे। पश्चिम बंगाल एवं केरल में वाम दलों के नेतृत्व वाली सरकारों और पार्टी के बीच संवाद की कमी तथा राजनीतिक वरीयताओं का जिक्र भी दस्तावेज में होगा।

उन्होंने कहा कि सांगठनिक कमजोरियों की पहचान कर उसके लिए सुधारात्मक कदम उठाये जाएंगे। हमें कारणों का आकलन करना पड़ेगा ताकि कार्रवाई के लिए ठोस दस्तावेज तैयार किया जा सके। यह आत्मनिरीक्षण की प्रक्रिया होगी।

प्रमुख सांगठनिक खामियों में बंगाल में किसानों और अल्पसंख्यकों का अलग थलग पड़ना, ग्रामीण क्षेत्र के गरीबों पर ध्यान में कमी, वाम शासित राज्यों में जनता को गोलबंद करने की बजाय सरकारी प्रशासन पर अधिक निर्भरता, नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच अहंकार और नौकरशाही की प्रवत्ति जैसे मसले शामिल हैं।

सूत्रों ने कहा कि पार्टी बंगाल के कुछ हिस्सों में माओवादियों के खतरों से अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा करने में पूरी तरह सफल नहीं रही है । माकपा के भारी संख्या में कैडर माओवादी हमले में मारे गये हैं जबकि उग्रवादियों के खतरे के कारण उसके कई समर्थक कुछ क्षेत्रों में पार्टी को छोड़ गये हैं।

पार्टी नेतृत्व द्वारा इन मुद्दों पर और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा तथा मुनाफा कमाने वाली सरकारी कंपनियों के निजीकरण के प्रयासों सहित आर्थिक नीति से जुड़े मसलों पर अगले कुछ सप्ताह में राष्ट्रव्यापी अभियान और आंदोलनों की रूपरेखा भी तैयार की जा सकती है।

मंहगाई और अन्य मुद्दों पर माकपा महासचिव प्रकाश करात और अन्य वाम नेताओं ने कहा है कि संप्रग सरकार खाद्यान्न के वायदा कारोबार पर प्रतिबंध और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सार्वभौमीकरण जैसे कदमों के जरिए कीमतों पर अंकुश लगाने में विफल रही है।

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