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पाक कमांडो ने 42 बंधकों को मुक्त कराया, अभियान खत्म

पाक कमांडो ने 42 बंधकों को मुक्त कराया, अभियान खत्म

रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय पर शनिवार को तालिबान आतंकवादियों के हमले के बाद नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को एक इमारत में बंधक बनाने के साथ शुरू हुआ नाटकीय घटनाक्रम 22 घंटे के बाद रविवार को कमांडो कार्रवाई के साथ खत्म हो गया। इसमें 42 बंधकों को छुड़ा लिया गया लेकिन आठ सुरक्षाकर्मियों समेत 20 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
    
सेना के मुख्य प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास ने कहा कि रविवार को आतंकवादियों की गोलीबारी में तीन बंधक मारे गए, जबकि स्पेशल सर्विस ग्रुप के दो कमांडो इमारत परिसर में राहत अभियान के दौरान मारे गए, जो सुबह साढे़ नौ बजे के आसपास खत्म हुआ। उन्होंने कहा कि पांच आतंकवादी भी मारे गए और पांच सुरक्षाकर्मी घायल हो गए।
     
घायल हालत में पकडे गए छठे आतंकवादी की पहचान अकील उर्फ डाक्टर उस्मान की रूप में की गई है जिसे हमले का मास्टरमाइंड माना जाता है। सेनाधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष तीन मार्च को लाहौर में श्रीलंका की क्रिकेट टीम पर हुए हमले और पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ पर नाकाम जानलेवा हमले के तार भी अकील से जुडे हुए हैं।
     
रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय पर शनिवार को हुए आतंकवादी हमले में चार आतंकवादी और मिल्रिटी इंटेलीजेंस के एक ब्रिगेडियर एवं लेफ्टिनेंट कर्नल समेत छह सैनिक मारे गए। हमले के दौरान कुल मिलाकर कम से कम 20 लोग मारे गए जिनमें सेना के छह जवान, दो कमांडो, नौ आतंकवादी और तीन बंधक शामिल हैं।

सभी 42 बंधकों को छुड़ा लिया गया है जिनमें सेना के जवान और असैन्य कर्मचारी शामिल हैं। बंधकों को छुड़ाने के लिए सुबह छह बजे से कुछ मिनट पहले अंतिम हमला बोला गया। इस बीच आसमान में हैलीकाप्टर मंडराते रहे और कई धमाकों की आवाज सुनी गई।
     
सैन्य प्रवक्ता अतहर अब्बास ने कहा कि सैनिक इलाके को साफ करने और सबूत जुटाने में लगे हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने इमारत पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया। समझा जाता है कि आतंकवादियों ने जिन इमारत में शरण ली थी, वह मिलिट्री इंटेलीजेंस एजेंसी का एक प्रमुख कार्यालय है।
     
इससे पहले शनिवार को स्वाचालित हथियारों और गोला बारूद से लैस तालिबान आतंकवादी सेना की वर्दी में एक सफेद वैन में सवार होकर सेना मुख्यालय परिसर के बाहर पहुंचे थे जहां सुरक्षा बलों की ललकार के जबाव में उन्होंने अंधाधुंध गोलियां बरसाईं।
     
इसके बाद आतंकवादियों ने समीप एक इमारत में सेंध लगाकर सुरक्षाकर्मियों और असैन्य कर्मचारियों को बंधक बना लिया था। सेना ने शुरू में कहा था कि इमारत में केवल 10-15 लोग हैं जिन्हें बंधक बनाया गया है लेकिन बाद की खबरों से संकेत मिला कि आतंकवादियों ने 50 से ज्यादा लोगों को बंधक बनाया जिनमें से आठ को बीती रात कथित रूप से छोड़ा् दिया गया था।
     
बंधकों को छुड़ाने और आतंकवादियों को मार गिराने की कडी में जानमाल का नुकसान कम से कम करने के लिए सेना ने तमाम इंतजाम किए थे। सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक इलाके में विद्युत आपूर्ति बीती रात नौ बजे से ही बंद कर दी गई थी जहां आतंकवादी छुपे हुए थे।

गृहमंत्री रहमान मलिक ने एक टीवी चैनल से कहा कि शहर के बाहर आतंकवादियों के ठिकाने से सुरक्षा बलों ने बेहद महत्वपूर्ण सुराग जुटाए हैं जहां आतंकवादी बीते दो माह से रह रहे थे। उन्होंने कहा कि छापे के दौरान आत्मघाती जैकेट में इस्तेमाल होने वाले प्यूज बरामद हुए हैं। इससे हमें पता चला कि आतंकवादियों के पास आत्मघाती जैकेट होंगे और हमें सतर्क रहना होगा।
     
प्रतिबंधित तहरीक ए तालिबान के एक धडे ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है लेकिन गृहमंत्री रहमान मलिक का कहना है कि तालिबान, अलकायदा का महज मुखौटा है और हाल में हुए ज्यादातर हमले तालिबान, अलकायदा और अन्य प्रतिबंधित आतंकी संगठनों ने मिलकर किए।
     
उन्होंने कहा कि इन हमलों की जडें कानूनविहीन दक्षिणी वजीरिस्तान के कबायली इलाके में हैं और सरकार ने इसे इलाके में आतंकवादियों के खिलाफ दोबारा अभियान छेड़ने का फैसला किया है। सेना प्रमुख अशफाक कयानी और सेना के अन्य आला अधिकारियों को इसके लिए मंजूरी दे दी गई है जो अभियान शुरू करने के समय के बारे में निर्णय लेंगे।

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