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आतंकियों ने नागरिकों और जवानों को बंधक बनाया

आतंकियों ने नागरिकों और जवानों को बंधक बनाया

पाकिस्तानी सेना के रावलपिंडी स्थित मुख्यालय पर शनिवार को हमले के बाद तालिबान आतंकवादियों ने एक नजदीकी इमारत में 10-15 लोगों को बंधक बना लिया है। आतंकवादियों ने जिन लोगों को बंधक बनाया है, उनमें कुछ नागरिक और सेना मुख्यालय के कर्मचारी शामिल हैं। इससे पहले सेना मुख्यालय परिसर में आतंकवादियों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में एक ब्रिगेडियर समेत छह जवान और चार आतंकवादी मारे गए।

सेना ने शुरू में दावा किया था कि हालात पर काबू पा लिया गया है लेकिन बाद में सेना प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास ने कहा कि चार-पांच आतंकवादियों ने 10-15 सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों को एक इमारत में बंधक बना रखा है। आतंकवादियों के पास हथियार और गोला-बारूद है।
     
अब्बास ने कहा कि सेना इस लिहाज से कदम उठा रही है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके लेकिन उन्होंने ज्यादा ब्यौरा देने से इनकार कर दिया। आंतकवादियों द्वारा बंधकों की रिहाई के बदले कोई मांग करने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और फिलहाल मीडिया के साथ मैं इसे साझा नहीं कर सकता।

तहरीक ए तालिबान द्वारा हमले की जिम्मेदारी लेने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस दावे की सत्यता के बारे में हमें नहीं पता और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद हम इस बारे में कुछ कहेंगे।

पाकिस्तानी सेना के रावलपिंडी स्थित मुख्यालय पर शनिवार को हमले के बाद तालिबान आतंकवादियों ने एक नजदीकी इमारत में 10-15 लोगों को बंधक बना लिया है। आतंकवादियों ने जिन लोगों को बंधक बनाया है, उनमें कुछ नागरिक और सेना मुख्यालय के कर्मचारी शामिल हैं। इससे पहले सेना मुख्यालय परिसर में आतंकवादियों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में एक ब्रिगेडियर समेत छह जवान और चार आतंकवादी मारे गए।

सेना ने शुरू में दावा किया था कि हालात पर काबू पा लिया गया है लेकिन बाद में सेना प्रवक्ता मेजर जनरल अतहर अब्बास ने कहा कि चार-पांच आतंकवादियों ने 10-15 सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों को एक इमारत में बंधक बना रखा है। आतंकवादियों के पास हथियार और गोला-बारूद है।
     
अब्बास ने कहा कि सेना इस लिहाज से कदम उठा रही है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जान बचाई जा सके लेकिन उन्होंने ज्यादा ब्यौरा देने से इनकार कर दिया। आंतकवादियों द्वारा बंधकों की रिहाई के बदले कोई मांग करने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और फिलहाल मीडिया के साथ मैं इसे साझा नहीं कर सकता।

तहरीक ए तालिबान द्वारा हमले की जिम्मेदारी लेने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस दावे की सत्यता के बारे में हमें नहीं पता और खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद हम इस बारे में कुछ कहेंगे।

इससे पहले, सुरक्षाबलों को भ्रमित करने के लिए सेना की वर्दी पहने हमलावर आतंकवादी एक सफेद वैन में बैठकर मुख्यालय के द्वार तक आए थे। टीवी चैनलों के मुताबिक सैनिकों ने हमलावरों को मुख्यालय परिसर में घुसने से रोकने की कोशिश की और भीषण मुठभेड़ शुरू हो गई। पाक सेना ने आतंकवादियों का मुकाबला करने के लिए कमांडो और हेलीकॉप्टरों की मदद ली।

टीवी चैनलों के अनुसार 45 मिनट तक चली मुठभेड़ के दौरान कई शीर्ष सैन्य अधिकारी परिसर में फंसे रहे। मुख्यालय तक जाने वाली सभी सड़कों को सील कर दिया गया और सिर्फ एंबुलेंस वाहनों को ही क्षेत्र में आने जाने दिया गया।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी ने हमले की निन्दा की। घटना के बाद पूरे पाकिस्तान में खासकर राजधानी इस्लामाबाद में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और संघीय मंत्रियों की सुरक्षा भी बढ़ाई गई है। तालिबान ने यह हमला ऐसे समय किया है जब पाकिस्तान के गहमंत्री रहमान मलिक ने अगले दो दिन में आतंकवादियों के गढ़ माने जाने वाले वजीरिस्तान में एक बड़ा आक्रामक अभियान चलाने की घोषणा की।

एक सप्ताह में यह तीसरा बड़ा हमला है। शुक्रवार को पाकिस्तान के पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत की राजधानी पेशावर में हमला हुआ था जिसमें 50 लोग मारे गए और 120 से अधिक घायल हो गए थे। प्रत्यक्षदर्शी ने एक समाचार चैनल को बताया कि मुख्यालय परिसर में स्थित इंटर सर्विसेस पब्लिक रिलेशंस कार्यालय के सामने गोलीबारी हुई। टीवी चैनलों ने कहा कि आतंकवादियों के सहयोगियों द्वारा कवरेज पर नजर रखे जाने की आशंका के चलते उन्होंने घटनास्थल की सीमित तस्वीरें ही दिखाईं।

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