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बढ़ी कुत्तों की आबादी, एमसीडी अब जागी

राजधानी में दो लाख 62 हजार आवारा कुत्ते हैं और राष्ट्रकुल खेलों से पहले करीब 70 फीसदी कुत्तों की नसबंदी कर दी जाएगी। पहली बार की गई गणना से निगम को कुत्तों की संख्या का सही आंकड़ा मिल गया है। निगम अब इनकी नसबंदी में तेजी लाएगी लेकिन कुत्तों की नसंबदी की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए निगम का यह दावा खोखला ही लगता है। दिलचस्प है कि करीब 48 फीसदी लोगों को रैबीज जैसी गंभीर बीमारी की जानकारी ही नहीं है।
निगम ने गणना के लिए एक एनजीओ को शामिल किया था। एसओस नामक एनजीओ ने रेंडम सेंपलिंग के आधार पर कुत्तों की गणना की है। एनजीओ ने कुत्तों के घनत्व को आधार मानते हुए गणना की है।
 नर कुत्ते एक लाख 34 हजार हैं और मादा एक लाख 28 हजार। दिल्ली में आवारा कुत्तों का कुल घनत्व पांच पशु प्रति किमी है और यह घनत्व पूरी दिल्ली में 3 से 10 जानवर प्रति किमी है। सिटी जोन में दस कुत्ते प्रति किमी घनत्व सबसे ज्यादा है।

नरेला में 7.7, रोहिणी में 5.8 और शाहदरा दक्षिण में 3 का घनत्व पाया गया है। शनिवार को मेयर डा.कंवर सेन ने एक संवाददाता सम्मेलन में इसकी जानकारी देते हुए बताया कि पहली बार कुत्तों की जनगणना से मिले आंकड़ों के आधार पर एमसीडी अब कुत्तों की नसंबदी में तेजी लाएगी। कामनवेल्थ गेम्स तक 70 फीसदी कुत्तों की नसबंदी का लक्ष्य रखा गया है।इस काम में तेजी लाने के लिए करावलनगर में नसंबदी यूनिट बनाने का काम चल रहा है।

अभी दस एनजीओ इस काम को कर रही है जिन्हें 445 रुपये प्रति कुत्ता नसंबदी के लिए दिया जाता है। पिछले तीन सालों के दौरान निगम नसबंदी पर साढ़े तीन करोड़ रुपये खर्च कर चुकी है और केवल 75 हजार कुत्तों की नसबंदी की जा सकी है।

इस साल भी अभी तक 16 हजार की नसबंदी की गई है जिससे निगम के दावे खोखले ही लगते हैं।  नसबंदी के मामले में नरेला, नजफगढ़, रोहिणी, शाहदरा उत्तरी, सिविललाइन, पश्चिमी, करोलबाग व दक्षिणी जोन की लचर स्थिति है।

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