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पीएम के दौरे से पहले बातचीत पर अलगाववादी बंटे

पीएम के दौरे से पहले बातचीत पर अलगाववादी बंटे

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कश्मीर दौरे से पहले घाटी के अलगाववादी नेता केंद्र सरकार के साथ बातचीत करने के मुददे पर आपस में बंटे हुए हैं। उदारवादी हुर्रियत नेताओं का कहना है कि उन्हें पेचीदा मसले पर अपनी ठोस नीति का खुलासा करना चाहिए, जबकि उग्रवादी और कट्टरपंथी नेता बातचीत का विरोध कर रहे हैं।

18 अक्तूबर को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की राज्य की दो दिवसीय यात्रा की शुरुआत पर कट्टरपंथी हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी द्वारा बुलाई गई हड़ताल के मुद्दे पर दोनों पक्ष बंटे हुए हैं। भारत और पाकिस्तान के साथ बिना शर्त बातचीत के लिए तैयार होने की बात कहने वाले हुर्रियत नेता मीरवाइज उमर फारुख ने कहा कि हुर्रियत का मानना है कि कश्मीर मुद्दे का समाधान सिर्फ बातचीत के जरिए हो सकता है।

मीरवाइज ने कश्मीर मसले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के ठोस नीति के साथ आने पर जोर देते हुए कहा कि सिंह को परंपरागत पैकेजों और राजनीति की बजाय समग्र कश्मीर नीति के साथ आगे आना चाहिए। मीरवाइज ने कहा उन्हें उम्मीद है कि सिंह खुले दिमाग और कश्मीरियों की आकांक्षाओं के अनुरूप कश्मीर मुद्दे को हल करने की इच्छा के साथ यहां आएंगे। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि सिंह का दौरा मामले के हल के लिए कश्मीरियों और पाकिस्तान के साथ परिणामोन्मुखी बातचीत की शुरुआत होगा।

इस बीच, पीडीपी के संरक्षक और पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने अलगाववादी समूहों के साथ बातचीत के लिए अपनी पसंद के लोगों को चुनने की केंद्र की नीति के प्रति उसे अगाह किया। सईद ने कहा कि केंद्र को कश्मीर समस्या के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए हुर्रियत कांफ्रेंस के सभी धड़ों समेत समाज के सभी वर्गों के साथ बिना शर्त बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार को पाकिस्तान और कश्मीरी नेताओं के साथ बातचीत शुरू करने के लिए सकारात्मक सोच के साथ यहां आना चाहिए। शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए शीर्ष स्तर पर बातचीत शुरू करने की जरूरत है।

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