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बरेली में बन रहे तीन नए मल्टीप्लेक्स

बरेली में इस समय पुराने सिनेमाहाल बदहाली की स्थिति में हैं जबकि महानगर में तीन नए मल्टीप्लेक्स बन रहे हैं, जिनके अगले मार्च माह तक चालू हो जाने की उम्मीद है। इनमें एक है रामपुर रोड पर शहर से दस किलोमीटर बाहर निर्माणाधीन आम्रपाली जैम। इसी तरह पीलीभीत रोड पर फन सिटी एम्यूजमेंट पार्क के पास एक

मल्टीप्लेक्स कानपुर की एक फर्म और दूसरा मल्टीप्लेक्स लखनऊ की एक कम्पनी बनवा रही है। ये तीनों ही मल्टीप्लेक्स अनुमानत: तीन-तीन स्क्रीन के होंगे। मगर दिल बहलाव के यह नए ठिकाने बरेली के पुराने सिंगिल स्क्रीन सिनेमाहॉल वालों की बेचैनी का सबब भी बन रहे हैं। राज्य सरकार की मल्टीप्लेक्स नीति में कर में पाँच वर्ष तक की छूट की अवधि अगले मार्च में समाप्त हो रही हैे इसलिए राज्य भर के महानगरों में इस समय मल्टीप्लेक्स जोर-शोर से बन रहे हैं। यह छूट मार्च के बाद बढ़ने की संभावना नहीं हैं।

बरेली सिनेमा एक्जीबिटर्स एसोसिएशन के सचिव और कमल सिनेमाहॉल के मालिक चेतन मेहरा तो साफ मांग उठाते हैं कि जिस तरह की सहूलियतों और कर छूट आदि के पैकेज मल्टीप्लेक्स वालों को दिए गए उसी तरह का पैकेज बंद पड़े या बंद होने के कगार पर पहुँच चुके सिंगिल स्क्रीन सिनेमाहॉल वालों के लिए प्रदेश सरकार को तुरंत घोषित करने चाहिए।

एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय मोहन अग्रवाल कहना है कि अगर प्रदेश सरकार ने सिंगिल स्क्रीन सिनेमाहॉलों की बदहाली दूर करने के लिए तत्काल कुछ ठोस कदम नहीं उठाए तो बरेली में भी अधिकांशि सिंगिल स्क्रीन सिनेमाहॉल बंद हो जाएंगे। यहाँ नावेल्टी काफी पहले ही टूटकर कामर्शियल काम्पलेक्स बन चुका है। बसंत और जीका पैलेस बंद पड़े हैं। इस वक्त बरेली में कैण्ट इलाके में नटराज, बड़ा बाजार में जगत, सिविल लाइंस में कुमार व इम्पीरियल, प्रभा, कमल, प्रसाद, हिन्द और जगत आदि सिंगिल स्क्रन सिनेमाहॉल चल रहे हैं। मगर इनमें से दो-चार को छोड़कर बाकी सिंगिल स्क्रीन सिनेमाहॉलों की हालत बदतर है।

नटराज सिनेमाहॉल के मालिक और वहाँ की एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय मोहन अग्रवाल के मुताबिक उनका सिनेमाहॉल बरेली में सबसे ज्यादा मनोरंजन कर देने में नटराज आज भी नम्बर वन बना हुआ है। श्री अग्रवाल के अनुसार अन्य सिंगिल स्क्रीन सिनेमाहॉल मालिक अपने सिनेमाहॉलों का सुन्दरीकरण और दर्शकों को बेहतर सहूलियतें देना चाहते हैं मगर मजबूर हैं। गिरती दर्शक आक्यूपेंसी (अधिभोग) दर, बढ़ती वीडियो पाइरेसी, केबल पर रोजाना दजर्नों फिल्मों का प्रसारण और प्रदेश सरकार की दोषपूर्ण व पक्षपात नीतियों के चलते अब सिंगिल स्क्रीन सिनेमाहॉल बदहाली से उबर ही नहीं पा रहे हैं।

 

 

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