DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

भजन लाल के बूते जीतते हैं कुलदीप

इस विधान सभा क्षेत्र पर भजन लाल का साठ के दशक से आज तक कब्ज़ा चला आ रहा है। एक बार भी ऐसा नहीं हुआ जब क्षेत्र के लोगों ने इस परिवार को नकारा हो। इस बार भी यह उनके प्रभाव क्षेत्र से बाहर जाता दिखाई नहीं देता। यह बात दीगर है कि भजन लाल की सक्रियता में कमी आने, पहले के मुकाबले ज्यादा स्वतन्त्र, पढ़ी-लिखी और खुले विचारों वाली युवा पीढ़ी के आने से धीरे-धीरे भजन का असर कम हो रहा है।

सम्भव है कि दो-एक चुनावों के बाद यह किसी अन्य चुनाव क्षेत्र जैसा ही हो जाए। यह भजन लाल के जादू का ही असर है कि आज उनका छोटा बेटा और हरियाणा जनहित कांग्रेस का सुप्रीमो कुलदीप विश्नोई यहां से उम्मीदवार है और कोई पार्टी उसे चुनौती नहीं दे पा रही। व्यापारी रणदीप गोदारा कहते हैं यहां कुलदीप का कुछ नहीं है। जो है भजन लाल का है। कुलदीप की हार भजनलाल की हार होगी और उसकी जीत भजन की जीत होगी।

कुलदीप के निकटतम प्रतिद्वन्दी हैं कांग्रेस के जयप्रकाश जिन्हें लोग जेपी के नाम से भी जानते हैं। भारतीय जनता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी उम्मीदवारों की हालत तो यह है कि लोग उनके नाम तक नहीं जानते। जयप्रकाश को जानने की वजह जहां एक ओर कांग्रेस पार्टी है वहीं उनका मूल चुनाव क्षेत्र बरवाला और आदमपुर दोनों ही हिसार संसदीय क्षेत्र में आते हैं। वे पूर्व सांसद होने के साथ ही हाल के लोक सभा चुनावों में भजन लाल के खिलाफ लड़ कर हार भी चुके हैं।

इस इलाके पर भजन लाल का जादू अब एक उतरता हुआ सैलाब है। नब्बे के दशक के अन्त में जब यह संवाददाता इस क्षेत्र में आया था तो लोगों को कहते सुना था कि भजन लाल यदि पत्थर को वोट डालने को भी कह दें तो हम सवाल नहीं पूछेंगे। इस बार वह बात नहीं दिखाई दी। उस समय लोग अपने नेता के खिलाफ न तो बात करते थे और न ही सुनने को तैयार थे।

अब खासतौर पर युवा पीढ़ी कहती है हम किसी का ऐहसान क्यों माने? जो ऐहसान था वह मेरे पिता पर था वो मानते रहें। ये कहने वाले लोग भी मिले कि हम लोकतन्त्र में जी रहे हैं, किसी से क्यों डरें? यहां के रमेश का कहना था राजनेता तो मौज करते हैं। ये एक महीने हमारे सामने हाथ जोड़ते फिर पांच साल हम इनके हाथ जोड़ते फिरते हैं।

एक बुज़ुर्ग रामदीन का कहना था कुछ भी हो कुलदीप फिलहाल तो चुनाव जीतेगा। उनके अनुसार भजन लाल ने यहां इतना काम किया है कि उनके जीतेजी लोग उन्हें निराश नहीं होने देंगे। चाहे उनका बेटा मैदान में आए या वो खुद। यह पूछने पर कि यदि ऐसा है तो उनकी जीत में वोटों का प्रतिशत गिर क्यों रहा है?

उनका जवाब था किसी का भी समय एक सा नहीं रहता। एक तो बीमारी के कारण उनका लोगों से सम्पर्क नहीं है, दूसरे कुलदीप की लोगों पर वह पकड़ नहीं है जो उनके पिता की हुआ करती थी और तीसरे नई पीढ़ी पहले से अधिक जागरूक है। वह अलग तरीके से सोचती है।

सारे प्रदेश की तरह ही यहां भी हजकां की स्लेट साफ है। जहां एक ओर उसके खिलाफ कुछ कहने को नहीं है वहीं उसके पास गिनाने को भी कोई उपलब्धि नहीं है। दूसरी ओर जयप्रकाश कांग्रसे के कामों को गिनाकर वोट मांग रहे हैं, लेकिन यह कितना असरदार साबित होगा यह कह पाना मुश्किल है। उन पर बाहरी व्यक्ति का ठप्पा भी लगा है जो उनके खिलाफ जा सकता है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:भजन लाल के बूते जीतते हैं कुलदीप