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राज्य में दर्ज होते हैं सिर्फ 20 फीसदी मामले

राज्य में हत्या, अपहरण, डकैती जैसे गंभीर मामले में ही नहीं मारपीट जैसे छोटे अपराध के इंवस्टिगेशन पर भी आरक्षी अधीक्षकों को निगरानी रखनी होगी। थानों में दर्ज होने वाले सिर्फ 20 फीसदी मामले ही गंभीर अपराध से जुड़े होते हैं। जबकि 80 प्रतिशत मामले मारपीट जैसे छोटे-मोटे मामलों में ही दर्ज होते हैं। लिहाजा राज्य पुलिस का जोर अब समाज में हो रहे छोटे अपराधों के अनुसंधान की निगरानी पर है।

शनिवार को कानून-व्यवस्था पर मंथन को जुटे राज्य भर एसपी, आईजी और डीआईजी को डीजीपी आनंद शंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नॉन एसआर केस(अविशेष प्रतिवेदित कांड)की मॉनिटरिंग वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर होगी। डीजीपी ने कहा कि पुलिस मुख्यालय ने इसके लिए नया सिस्टम भी विकसित किया है।

दूसरी ओर उन्होंने अधिकारियों को यह भी हिदायत दी कि भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए अपने मातहत अधिकारियों पर नजर रखें। अगर उनके अधीनस्थ पदाधिकारी भ्रष्टाचार कर रहे हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।

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