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बटाईदारी लागू करने के लिए माले का अल्टीमेटम

माले ने नीतीश सरकार को बटाईदारी कानून को लागू करने का डेढ़ महीने का अल्टीमेटम दिया है। माले के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि बटईदारों के हितो की अनदेखी की गई तो एक तरफ नीतीश सरकार चौथी वर्षगांठ मनायगी तो दूसरी तरफ माले बिहार बन्द करेगा।

उन्होंने कार्यकर्ताओं का आह्वान किया कि बटाईदारी को लेकर वे निर्णायक संघर्ष करने को तैयार रहें। भूमि सुधार बिना बिहार का विकास संभव ही नहीं है। शनिवार को यहां भूमि सुधार जनसम्मेलन में पूरे राज्य से जुटे भूमिहीनों और बटाईदार किसानों को जदयू-भाजपा, राजद-लोजपा और कांग्रेस समेत अन्य मध्यमार्गी दलों से बचने की सलाह देते हुए उन्होंने कहना कि नीतीश कुमार का रवैया तो स्पष्ट हो चुका है।

वे सामंतों और जमीन्दारों का हित चाहते हैं। भाजपा और कांग्रेस के अन्दर भूमि सुधार ताकतों का जमावड़ा है और ये दोनों पार्टियां भूमि सुधार का विरोध करने के मामले में एक दूसरे को पछाड़ने में लगे हैं। लालू प्रसाद को इस पर अपनी राय स्पष्ट करनी होगी। रामविलास पासवान को बताना होगा कि सामंतों के हित में है कि बटाईदारों को हक देने के पक्ष में हैं।

उन्होंने कहा कि नीतीश ने एक तरफ अमीरदास आयोग को खारिज किया तो दूसरी तरफ जनसम्मेलन का उद्घाटन करते हुए अर्थशास्त्री एनके चौधरी ने कहा कि भूमि सुधार के एक व्यापक मोर्चा खड़ा करके विरोधी ताकतों को करारा जवाब देना होगा।

हालांकि जनसम्मेलन मं निमंत्रण देने के बावजूद सीपीआई और सीपीएम के नेताओं ने जनसम्मेलन में शिरकत नहीं की। इस संबंध में श्री भट्टाचार्य ने कहा कि माले जन संघर्षो के मुद्दे पर वाम दलों को एक मंच पर लाने का काम जारी रखेगा।

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