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सस्ती जैविक खेती की दिशा में वैज्ञानिकों का कमाल

देश में सस्ती जैविक खेती की दिशा में राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीव ब्यूरो (एनबीएआईएम) के वैज्ञानिक इतिहास रचने की ओर अग्रसर हैं। अथक प्रयास से संरक्षित किए गए तीन हजार 17 सूक्ष्मजीवों के आणविक गुण चिह्न्कन से चमत्कारी परिणाम सामने आए हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि कृषि क्षेत्र में शीघ्र ही रसायनों और कीटनाशकों की जरूरत खत्म हो जाएगी।

सस्ते जैविक टीके मिट्टी को उपजाऊ बनाने के साथ फसलों को रोगमुक्त भी रखेंगे। निदेशक व वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो. दिलीप के अरोड़ा का कहना है कि नई खोज कृषि के क्षेत्र में क्रांति लाएगी और सस्ती भी होगी। उन्होंने बताया कि अमेरिका में रखे गए भारतीय मूल के 1800 कवक भी मंगाने की कार्रवाई चल रही है।

देश में रासायनिक खाद व कीटनाशी के बढ़ते उपयोग से खाद्यान्न और फलों में जहरीले तत्व बढ़ने की चेतावनी दी जा रही है। यही वजह है कि बेहद महंगा होने के बावजूद हर शहर में जैविक खाद्यान्न खरीदने वालों की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में नई दिल्ली से मऊ के कुसमौर में स्थानांतरित राष्ट्रीय कृषि उपयोगी सूक्ष्म जीव ब्यूरो (एनबीएआईएम) के 11  वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसे माइक्रोआर्गनिज्म की खोज में सफलता पायी है जिनसे फसलों और पौधों में बगैर रसायन डाले उन्हें रोगमुक्त करके उत्पादन बढ़ाया जा सके।

मिट्टी, अनाज, फल-फूल और सब्जी पर इसके उपयोगों के बेहतर परिणाम से वैज्ञानिक खासे उत्साहित हैं। अब एनबीएआईएम के सूक्ष्मजीव संग्रह केन्द्र में कुल 3017 सूक्ष्मवर्धन उपलब्ध हैं। इनमें 2477 कवक, 494 जीवाणु, 36 एक्टीनोमाईसीट्स और 10 यीस्ट के हैं। इन्हें उत्तर प्रदेश, हिमाचल, मध्य प्रदेश, अरुणाचल, असम, राजस्थान, बिहार, केरल और सुंदरवन क्षेत्रों में जाकर ढूंढा गया है। इसमें 600 सूक्ष्मजीवों का जर्मप्लाज्म गुण चिह्नंकन हो चुका है। वरिष्ठ वैज्ञानिक आलोक कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि वैज्ञानिक अब मैग्रूव, लेह, असम, कच्छ आदि दुरूह और अतिवादी जलवायु वाले क्षेत्रों में खोज कर रहे हैं।

सर्वेक्षणों में प्राप्त विभिन्न प्रजातियों स्युडोमोनास, फ्लुरेसेंस, स्युडोमोनास एरूजिनोसा, बैसीलस, सबटिलिस, बी. ब्रेविस, हाइपोस्रेला डिस्कोडिया, मैटरीजियम एनीसोपली, स्युडोमोनास प्रजाति, ट्राइकोडर्मा हजिर्यानस, टी. कोनिंघी, वर्टिसीलियम लेकानी आदि सूक्ष्मजीव को प्रयोगशाला स्तर पर मृदाजनित रोगमूलक कवक (फंजाई) निरोधक पाया गया है। चने में फयुजेरियस जनित सूखारोग की रोकथाम के लिए स्युडोनोमास फ्लुरेसेंस पीएफ 4-92 प्रभावी पाया गया। उसर भूमि को उर्वरा बनाने में सूक्ष्मजीव मैक्रोफेमिना फिसियोलिना से केवल दो घंटे में तरल नाइट्रोजन के प्रयोग के बिना जीनोमिक डीएनए प्राप्त किए जा सकते हैं।

श्रीवास्तव ने बताया कि ऐसे जीवाणविक टीके विकसित किए गए हैं जो मृदा लवणता (उसर) के हानिकारक प्रभावों को कम करते हैं और लवण प्रभावित भूमि में गेहूं की पैदावार बढ़ाते हैं। इन सूक्ष्मजीवों में आठ प्रतिशत की लवण सांद्रता पर आईएए और घुलनशील फास्फोरस पैदा करने की क्षमता होती है। पैनीसीलियम परिवहन और भंडारण के समय नीबू, संतरे और दूसरे फल-सब्जियों में सड़न व गलन नहीं होने देता। राइजोपस भी फसल व फलों को हानि से बचाते हैं। पैसीलोमाइसिस और ब्यूवेरिया कवक कीटनाशी है।

राइजोबियम सूक्ष्मजीव दलहन की उत्पादकता में बेहद कारगर पाया गया है। मृदा सूक्ष्मजीव एजोपाइरिलम उष्णकटिबंधीय पौधों की नाइट्रोजनधारण क्षमता बढ़ाते हैं। निदेशक प्रो. दिलीप के अरोड़ा का कहना है कि कुछ प्रमुख अन्त:सहजीवी सूक्ष्मजीवों की कृषि में उपयोगिता और जैव कीटनाशी टीकों का विकास भी ब्यूरो द्वारा किया जा रहा है ताकि रासायनिक कीटनाशकों का प्रभावी विकल्प किसानों को उपलब्ध कराया जा सके। विदेशी वैज्ञानिकों का दल इस उपलब्धि से आश्चर्यचकित है।

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