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पुलिस ने फिर भी किया खेल

आम पब्लिक के साथ पुलिस धाराओं में खूब खेल करती है। डकैती को चोरी दिखाती है और सरेराह लूट को जालसाजी बना डालती है। कानून के शिकंजे में जब वर्दीवाले खुद फंसने लगें, तो पुलिस का यह खेल और तगड़ा हो जाता है। मोनिका-गौरव प्रकरण में भी यही कहानी दोहराई गई है। गौरव मोनिका के अपहरण और उसकी कथित हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज कराना चाहता था।

इसके लिए उसने साहिबाबाद थाने में उसी तरह की तहरीर भी दी थी, मगर पुलिस ने हाईकोर्ट के हस्तक्षेप पर भी अपना खेल खेल दिया। साजिश, झूठे साक्ष्य बनाने, गौरव को बंधक बनाकर रखने की धाराएं तो खोलीं, लेकिन मोनिका के अपहरण और उसकी कथित हत्या के मामले में कलम नहीं चलाई। कायदे से मोनिका के परिजनों पर सीधे तौर पर हत्या का मामला दर्ज करना चाहिए था, लेकिन शातिर पुलिस ने यहां धारा 166, 167, 342, 203 और 102 के तहत मामला दर्ज किया है।

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