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लक्ष्य-भेदी रिज्यूमे

किसी भी कंपनी में रिज्यूमे भेजने से पहले अगर आप ऐसी कल्पना कर लें कि आपकी टेबल पर एक नौकरी के लिए आए सैकड़ों रिज्यूमे का अंबार लगा है, और आपको इंटरव्यू के लिए सिर्फ पांच रिज्यूमे छांटकर निकालने हैं, तो आपको निशाना भेदने वाला रिज्यूमे बनाना निश्चित रूप से आ जाएगा। दरअसल जिस रिज्यूमे में बड़े मजबूत ढंग से ‘ऑब्जेक्टिव’ लिखा गया हो, उसके  टारगेट हासिल करने की सबसे ज्यादा संभावना होती है। यही नहीं, रिज्यूमे में स्ट्रांग टाइटल और सटीक सिनोप्सिस भी लक्ष्य भेदने में कारगर साबित होता है।
इसमें दोराय नहीं कि रिज्यूमे पढ़ने वाला कोई भी शख्स, ऑब्जेक्टिव देखकर ही तुरंत इस बात का फैसला कर सकता है कि उस रिज्यूमे को आगे गौर से पढ़ा जाए, या नहीं। इसीलिए ऑब्जेक्टिव का असरदार होना बेहद जरूरी है। ऑब्जेक्टिव ही आपके व्यक्तित्व और कार्य अनुभव का ट्रेलर होता है।
किसी भी रिज्यूमे के सिनोप्सिस में नियोक्ता आमतौर पर इन सवालों के जवाब चाहता है-
ल्ल आपका कार्यक्षेत्र क्या है? आप किस विभाग में और किस पद पर काम करना चाहते हैं?
ल्ल इस क्षेत्र में और इस पद पर जिम्मेदारी संभालने का आपको कितना पूर्व-अनुभव है?
ल्ल इस पद के लिए आपके पास कौन-कौन सी विशेष योग्यताएं और स्किल्स हैं?
ल्ल इस पद से जुड़ी कौन सी जटिल समस्याएं आप अब तक सुलझा चुके हैं, और आपके एचीवमेंट्स क्या हैं?
ल्ल आपके करियर के अब तक के विकास के पड़ाव कौन-कौन से हैं?
ल्ल आपके व्यक्तित्व और कार्यशैली के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
कहने का मतलब यह है कि रिज्यूमे-ऑब्जेक्टिव आपकी कामयाबियों का सारांश होता है। यह तीन या चार वाक्यों (या बिंदुओं) के दो पैराग्राफ से बड़ा बिलकुल नहीं होना चाहिए। 

 

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