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ग्लेशियर का पिघलना गंभीर संकेत

काठमांडू स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर माउंटेन डेवलेपमेंट संस्था ने हाल में अपने एक सर्वेक्षण में बताया है कि यदि पृथ्वी का तापक्रम लगातार ऐसे ही बढ़ता गया तो पांच दशकों में ग्रीन हाउस गैसों के कारण हिमालय के ग्लेशियर गायब हो सकते हैं और उत्तरी भारत रेगिस्तान में बदल सकता है। जो कि हिमालयीय नदियों के लिए तबाही का एक बड़ा संकेत है। भारतीय संस्थान ने सर्वेक्षण में यह बताया कि हिमालयीय ग्लेशियर हर वर्ष पिघल रहे हैं। इससे कई झीलों का निर्माण हो सकता है। इन झीलों के टूटने की हालत में भारी तबाही हो सकती है। अब हिमालय की सदानीरा और जीवनदायी नदियों के अस्तित्व के लिये भारी खतरा पैदा हो गया है। यूएनओ के एक अन्य सर्वेक्षण में यह बताया गया है कि ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्र की सतह बढ़ने पर तट का एक बड़ा भू भाग पानी में डूब सकता है और लाखों लोग बेघर हो सकते हैं। जब तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सजर्न को नहीं रोका जाता, तब तक पृथ्वी का अस्तित्व खतरे में रहेगा।

बबिता थपलियाल, देहरादून

निष्पक्ष निर्णय दे न्यायपालिका

दुख की बात है कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है। अपराधी को सजा दिलाने का काम न्यायपालिका का होता है, लेकिन जब न्यायपालिका के कर्ता-धर्ता, वकील, न्यायाधीश खुद ही भ्रष्ट होते जा रहे हों तो जनता को उन पर क्या विश्वास होगा। देश के मुख्य न्यायाधीश के.जी. बालाकृष्णन भी स्वीकारते हैं कि कुछ लोग न्यायपालिका की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। इससे लोगों का न्यायपालिका के प्रति विश्वास घट रहा है। आज सबसे पहले न्यायपालिका में सुधार की जरूरत है, ताकि लोगों को न्याय मिल सके।
 
चन्द्रशेखर पैन्यूली, श्रीनगर, गढ़वाल

सामने खड़े हैं महंगाई ताऊ

बढ़ती हुई महंगाई ने मुझे सोचने पर मजबूर किया है कि मैं दीपावली कैसे मनाऊँ। दीप जलाऊँ या मिठाई खाऊँ, क्योंकि सामने खड़े हैं ‘महंगाई ताऊ।’ हर वर्ष सरकार त्योहारों में थोड़ा जनता को रियायत देकर अपना भला तो करती ही थी, साथ में थोड़ा बहुत गरीबों का भी भला हो जाया करता था। लेकिन इस साल ‘सरकार चुप’ है और आवाम फिक्र में है कि दीपावली कैसे मनाऊँ, दीप जलाऊं या बच्चों के कपड़े बनाऊं, क्योंकि सामने खड़े हैं ‘महंगाई ताऊ।’ आर्थिक मंदी क्या है, मैं क्या जानूँ मैं तो आम जनता हूं, जिसे यह चिंता है कि दीप के लिए तेल कहां से लाऊँ, दूध बिन मिठाई कैसे बनाऊँ, सोनू, मोनू और गुड़िया को कैसे समझाऊँ के सामने खड़े हैं ‘महंगाई ताऊ।’

अर्चना कश्यप, 8 गोविन्दपुरी, नई दिल्ली

 

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