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गुरूदत्त के पुत्र ने कहा, जीवनकाल में नहीं मिली पहचान

गुरूदत्त के पुत्र ने कहा, जीवनकाल में नहीं मिली पहचान

न्यूयार्क में चल रहे भारतीय फिल्मकार गुरु दत्त की फिल्मों के समारोह में इस निर्माता निर्देशक की चुनिंदा फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है। फिल्म सोसाइटी ऑफ लिंकन सेंटर द्वारा आयोजित यह समारोह 11 अक्टूबर तक चलेगा। इस समारोह में गुरु दत्त की बतौर निर्देशक, लेखक, नायक और निर्माता आठ फिल्मों का प्रदर्शन होगा।

फिल्मों के प्रदर्शन के इतर गुरु दत्त के बेटे अरुण दत्त ने फिल्मकार के व्यावसायिक और व्यक्तिगत जीवन की दुर्लभ झलक प्रस्तुत की। हालांकि उन्होंने कहा कि उनके पिता की फिल्मों को व्यावसायिक स्तर पर बहुत सफलता मिली, लेकिन स्वयं उन्हें अपने जीवनकाल के दौरान वास्तविक पहचान नहीं मिल सकी।

अरुण दत्त ने न्यूयार्क पब्लिक रेडियो से कहा उन्हें उनके जीवनकाल के दौरान पर्याप्त पहचान नहीं मिली। उन्होंने कहा 80 के दशक में जब उनकी फिल्मों की चर्चा यूरोप में शुरू हुई तो भारत में लोगों ने उनकी फिल्मों को ज्यादा देखना शुरू किया और उन्हें भारतीय सिनेमा में महान फिल्मकार कहा जाने लगा।

समारोह में सबसे पहले गुरु दत्त और वहीदा रहमान अभिनीत प्यासा का प्रदर्शन किया गया। इस फिल्म को टाइम पत्रिका ने सर्वकालीन सर्वश्रेष्ठ 100 फिल्मों में शामिल किया है। इस सूची में कागज के फूल भी शामिल है, जो भारत की पहली सिनेमास्कोप फिल्म है।

समारोह का शीर्षक 'ए हार्ट एज बिग एज द वर्ल्डः द फिल्म्स ऑफ गुरु दत्त' है। इसमें दत्त के जीवन पर आधारित एक वृत्तचित्र का भी प्रदर्शन किया जाएगा। वृत्तचित्र का निर्माण यूके चैनल 4 ने किया है और इसका निर्देशन नसरीन मुन्नी कबीर ने किया है। वृत्तचित्र में गुरु दत्त के साथ कई फिल्मों में काम कर चुकी वहीदा रहमान और निर्देशक श्याम बेनेगल और मणि कौल के साक्षात्कार शामिल हैं।

प्यासा के प्रदर्शन के दौरान अरुण दत्त ने कहा कि उनके पिता ऐसे पहले भारतीय फिल्म निर्माता थे, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत में पहली बार फिल्मों के माध्यम से राजनीतिक और सामाजिक ढांचे पर प्रश्न उठाए।
 समारोह में बाज, मिस्टर एंड मिसेज 55, आर-पार, कागज के फूल, चौदहवीं का चांद और साहब बीबी और गुलाम फिल्म का भी प्रदर्शन होगा।

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