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दीपावली पर होगी इको फ्रेंडली पटाखों की धूम

बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण और पटाखा निरोधी अभियान के चलते इस दीपावली पर नवाबों की नगरी लखनऊ में इको फ्रेंडली पटाखों की धूम रहेगी। यह पर्यावरण प्रदूषण नहीं करने के साथ ही ग्राहकों की जेब पर भी बोझ नहीं डालते हैं।

इस बार दीपावली पर 25 से 30 फीसदी कम कीमत वाले चौको मैजिक, गोल्क और मिक्स कलर वाले पटाखे नवाबों की नगरी के बाजार में सज चुके हैं।

पटाखों के थोक व्यापारी गुलशेर आजाद ने बताया कि अनार और चरखी के बाद इस बार प्रदेश के बाजारों में इको फ्रेण्डली पटाखों की सबसे ज्यादा मांग है और आम आदमी पटाखों की नई जमात को भी काफी पसन्द कर रहा है।

उन्होंने बताया कि इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए पटाखा बनाने वाली कंपनियों ने इस ब्रांड के पटाखों की कई रेंज निकाल दी है।

उन्होंने कहा कि दो तीन साल पहले गिने चुने लोग ही इन पटाखों को लेते थे लेकिन इनकी विशेषताओं को देखते हुए लखनऊवासियों का इन पटाखों की तरफ काफी रुझान बढ़ा है और बाजार में मांग के चलते कंपनी भी इसका काफी तादाद में उत्पादन कर रही है।

आजाद ने बताया कि यह पटाखे चलाने में बेहद आसान है और इनका मजा घर बैठकर भी लिया जा सकता है, क्योंकि न तो इनमें से आग निकलती है और न ही धुंआ उठता है। वैक्यूम सिस्टम पर काम करने वाले इन पटाखों से ध्वनि के साथ रंग बिरंगे कागज के टुकड़े इत्यादि भी निकलते हैं।

यह पटाखे तमिलनाडु के शिवाकाशी में बनाये जाते हैं और इनका फुटकर मूल्य 40रुपए से लेकर 1500 रुपए तक के बीच होता है।

इन पटाखों के खरीदार सुलभ रस्तोगी ने बताया कि पहले बच्चों को पटाखे देने में भय लगता था, लेकिन अब इको फ्रेन्डली पटाखों के आने से बच्चों की खुशी दुगनी हुई है और आर्थिक बोझ भी कम हो गया है।

रस्तोगी के पुत्र अभिनव रस्तोगी (8) ने बताया कि उनके स्कूल सिटी मान्टेसरी द्वारा चलाये जा रहे पटाखा विरोधी अभियान के चलते पटाखों के साथ खेलने में दिक्कत आती थी। मगर इस बार बाजार में प्रदूषण रहित पटाखों के चलते उनकी खुशी दुगुनी हो गयी है और वह इस बार दीपावली इन पटाखों के साथ धूम धड़ाके से मनायेगे।

गोंडा के आतिशबाज रईस उर्फ नन्हें ने बताया कि पूरे शहर में इस बार इको फेंड्रली पटाखों की मांग काफी बढ़ गई है और शादी विवाह, दशहरा और दुर्गापूजा जैसे अवसरों पर भी इन पटाखों की खपत होने लगी है और उम्मीद है कि दीपावली पर काफी बिक्री होगी।

पटाखा निरोधी अभियान से जुड़े प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक शैलजाकांत मिश्र ने कहा, दीपावली के त्यौहार पर जहां एक तरफ अकेले राजधानी लखनऊ में आतिशबाजी पर बीस से 25 करोड़ रुपए तक खर्च कर दिये जाते हैं। वहीं महीनों तक लखनऊ में प्रदूषण बिखरा रहता है, जिसका प्रतिकूल असर न केवल आदमी के स्वास्थ्य पर पड़ता है बल्कि लम्बे समय तक राजधानी का वातावरण भी प्रदूषित रहता है।

मिश्र ने बताया कि वर्ष 2001 में आतिशबाजी के पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए उच्चतम न्यायालय ने व्यापक दिशा निर्देश जारी करते हुए सभी राज्य सरकारों को निर्देशित किया था कि धार्मिक अवसरों पर आतिशबाजी से पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव का व्यापक प्रचार करे जिससे लोगों में जागरुकता पैदा हो।

यदि आप पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हैं और ध्वनि तथा वायु प्रदूषण कम करने में अपना योगदान देना चाहते हैं तो इस वर्ष अपनी दीपावली को इको फ्रेंडली पटाखों के साथ दीप पर्व मनाकर अपनी खुशियों को बांट सकते हैं।

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