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क्वात्रोच्चि मामले में निजी दखल आधारहीनः सीबीआई

क्वात्रोच्चि मामले में निजी दखल आधारहीनः सीबीआई

केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने इतालवी व्यवसायी ओत्तावियो क्वात्रोच्चि के खिलाफ बोफोर्स रिश्वत मामला वापस लेने का विरोध करते हुए एक वकील द्वारा दाखिल याचिका की शुक्रवार को मुखालफत की और कहा कि किसी निजी पक्ष का इसमें दखल देने का कोई आधार नहीं बनता।

जांच एजेंसी ने मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट कावेरी बावेजा के समक्ष कहा कि ऐसे मामलों में प्रचार और राजनीति की कोई भूमिका नहीं होती और मामले को बंद करने के खिलाफ एक निजी पक्ष द्वारा दाखिल याचिका को खारिज किया जाना चाहिए।

सीबीआई ने कहा कि एक निजी पक्ष को अदालत और सीबीआई के बीच के मामले में दखल देने का कोई आधार नहीं है और ऐसी याचिका को शुरुआत में ही खारिज किया जाना चाहिए। अधिवक्ता अजय अग्रवाल ने सीबीआई के फैसले को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर कर कहा है कि वह 69 वर्षीय क्वात्रोच्चि के खिलाफ पर्याप्त सबूत होने के बावजूद राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले को बंद करने का प्रयास कर रही है। अदालत ने सीबीआई को इस याचिका का जबाव देने का निर्देश दिया था, जिसके आधार पर ही वह अपना पक्ष रख रही थी।


इससे पूर्व सीबीआई के वकील यूएस प्रसाद ने क्वात्रोच्चि के खिलाफ दायर मामले को इस आधार पर बंद करने के लिए अदालत की अनुमति मांगी कि उनके खिलाफ मामला जारी रखना अन्याय होगा। जांच एजेंसी ने कहा कि मामले की सुनवाई के लिए वह मलेशिया और अर्जेंटीना से इतालवी व्यावसायी को प्रत्यार्पित कराने के दो प्रयास विफल होने के बाद इस नतीजे पर पहुंची है। एजेंसी ने दावा किया कि मामले को वापस लेने का फैसला सद्भावना और जनहित  में लिया गया है।

अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल पीपी मल्होत्रा तथा अधिवक्ता नवीन के मट्टा ने अदालत से कहा कि किसी भी मौके पर मलेशिया और अर्जेंटीना से क्वात्रोच्चि को लाने के प्रयास विफल हुए हैं। मलेशियाई अदालत ने मामले के गुण दोषों पर भी विचार किया है।

अदालत ने सीबीआई की अपील पर कोई आदेश नहीं दिया था और उसे अग्रवाल की याचिका पर जवाब देने को कहते हुए मामले को आज आगे की सुनवाई के लिए तय कर दिया था। दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा 31 मार्च 2005 को मामले के अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप निरस्त करने के बाद इस दो दशक पुराने मामले में क्वात्रोच्चि एकमात्र जीवित आरोपी हैं। वह देश की किसी अदालत में कभी पेश नहीं हुए हैं।

सीबीआई दो बार क्वात्रोच्चि का प्रत्यार्पण कराने में विफल रही है । पहली बार वर्ष 2003 में मलेशिया से और दूसरी बार वर्ष 2007 में अर्जेंटीना से।
 सीबीआई ने बाद में इंटरपोल से भी क्वात्रोच्चि के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने को कहा था।

पूर्व एटॉर्नी जनरल मिलन के बनर्जी की राय के आधार पर सीबीआई ने इंटरपोल से संपर्क किया था। सीबीआई ने गत वर्ष बनर्जी से इस बारे में राय जानना चाही थी कि क्या क्वात्रोच्चि का नाम सूची में रहने दिया जाना चाहिये। दलीलें संक्षिप्त में सुनने के बाद अदालत ने 24 अक्तूबर के लिये अपना आदेश सुरक्षित रखा है।

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