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सेना व मानसून के बीच फंसे हैं तमिल विस्थापितः एमनेस्टी

सेना व मानसून के बीच फंसे हैं तमिल विस्थापितः एमनेस्टी

श्रीलंका में बंदी शिविरों में रखे गए लगभग ढ़ाई लाख विस्थापित तमिलों को मानवीय आपदा का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बारिश की वजह से उनके शिविरों में बाढ़ का पानी घुसने का खतरा है।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने शुक्रवार को एक बयान में आरोप लगाया कि श्रीलंका सरकार वावूनिया जिले में राहत शिविरों में आधारभूत सेवाएं उपलब्ध कराने में विफल रही है। इन शिविरों में आवश्यकता से अधिक लोगों को रखा गया है, जिनमें मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है।

सितंबर में हुई भारी बारिश से नदियों में आए उफान से इन शिविरों में पानी भर गया। इतना ही नहीं बारिश की वजह से सीवर का पानी भी शिविरों में भर गया। श्रीलंकाई विशेषज्ञ योलांडा फोस्टर ने कहा कि लोग इन शिविरों को छोड़ना चाहते हैं। सरकार को इन विस्थापित लोगों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना चाहिए।

मई में लिट्टे के साथ लड़ाई खत्म होने के बाद हजारों लोगों को इन शिविरों में बंद कर दिया गया। सुरक्षाबल अक्सर इस बात को लेकर जांच करते रहते हैं कि कहीं ये लोग लिट्टे के सदस्य तो नहीं हैं। इस दौरान उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।


जांच के दौरान लगभग दस हजार लोगों की पहचान लिट्टे के पूर्व सदस्यों के रूप में हुई जिन्हें अलग-अलग बंदी केंद्रों में रखा गया है। पूर्व में एमनेस्टी की ओर से जांच प्रक्रिया पर स्वतंत्र निगरानी तथा जवाबदेही की कमी पर चिंता व्यक्त की जा चुकी है।

बयान में कहा गया है कि एमनेस्टी को ऐसी खबरें मिली हैं कि एक बार की जांच के बाद बहुत से विस्थापितों को दूसरे शिविरों में स्थानांतरित कर दिया गया है, जहां स्थानीय अधिकारी उनकी फिर से जांच कर सकते हैं।

मानवाधिकार संगठन ने कहा कि इन विस्थापितों को रिहा करने के नागरिक प्रशासन के प्रयासों में सेना बाधा पैदा कर रही है। संगठन ने कहा कि श्रीलंका सरकार पुनर्वास और वापसी योजना में इन बंदियों को आवश्यक रूप से शामिल करे।

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