DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सिल्वर स्क्रीन पर चालीस साल

सिल्वर स्क्रीन पर चालीस साल

शेरवुड और किरोड़ीमल कॉलेज से पढ़ाई पूरी करने के बाद जब अमिताभ बच्चन को कोलकाता में शिपिंग कंपनी शॉ एंड वैलेस की नौकरी रास नहीं आयी, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व.इन्दिरा गांधी की चिट्ठी लेकर वह ख्वाजा अहमद अब्बास के पास मुम्बई पहुंच गये। अब्बास उस समय ‘सात हिन्दुस्तानी’ का निर्माण कर रहे थे। अमिताभ बच्चन को देख कर उन्होंने तुरंत ही टीनू आनन्द को हटा कर अनवर अली की भूमिका अमिताभ बच्चन को सौंप दी। इसके साथ ही इलाहाबाद के इस लड़के की बॉलीवुड के ग्लैमर के ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर असफलताओं से भरी शुरुआत हुई।
 
अमिताभ बच्चन ने सफल होने से पहले कोई तेरह फिल्मों की असफलता का सामना किया। इस दौरान उन्होंने ‘संजोग’, ‘प्यार की कहानी’, ‘रास्ते का पत्थर’, ‘एक नजर’ और ‘बंसी बिरजू’ जैसी इमोशनल फिल्में भी कीं और ‘गरम मसाला’ तथा ‘बॉम्बे टु गोवा’ जैसी फिल्मों में कॉमेडी भी की। स्टार बनने की जद्दोजहद में वह ‘परवाना’ में खलनायक तक बने। जिस एक्शन ने उन्हें सुपर स्टार बनाया, उसी एक्शन से भरपूर ओ.पी. रल्हन की फिल्म ‘बंधे हाथ’ में वह बुरी तरह से पिटे भी। इसके बाद आयी  प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘जंजीर’। इस फिल्म को उस जमाने के बड़े अभिनेता जैसे देव आनंद और राजकुमार पहले ठुकरा चुके थे। तब फिल्म के लेखक जावेद अख्तर ने प्रकाश  मेहरा को अमिताभ बच्चन का नाम सुझाया। 11 मई 1973 को ‘जंजीर’ की रिलीज के साथ ही एंग्री यंगमैन का उदय हुआ, जिसे धारण कर अमिताभ बच्चन पूरे भारत में सुपर स्टार बन कर छा गये।

अमिताभ बच्चन को कुछ हद तक भाग्यशाली कहा जा सकता है। यदि अभिनेता राजकुमार को प्रकाश मेहरा के बालों में लगे तेल की सुगन्ध खराब न लगती तो शायद अमिताभ ‘जंजीर’ में काम न पाते। यह वह दौर था, जब पहले 1962 में चीन और बाद में 1965 में पाकिस्तान से युद्ध से लगभग बर्बाद हो चुके देश में भीषण महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याएं थीं। उस समय के युवाओं में भरे आक्रोश की अभिव्यक्ति इंस्पेक्टर विजय खन्ना के रूप में अमिताभ ने कर दी थी। देखते ही देखते अमिताभ अपनी फिल्मों के जरिये युवा आक्रोश के प्रतीक बन गये, जो हर व्यवस्था को उखाड़ फेंकना चाहता था और जो अनाथ, बेसहारा, लाचार और गरीबों का मसीहा भी था। फिल्म ‘दीवार’ में जमीन पर गिरे पैसे न उठाने वाले उस लड़के ने अमिताभ बच्चन को सुपर स्टार के रूप में स्थापित कर दिया। रही-सही कसर कीर्तिमान व्यवसाय करने वाली फिल्म ‘शोले’ ने पूरी कर दी। 1976 से 1984 के बीच अमिताभ बच्चन का करियर जबर्दस्त ऊंचाई पर था। उन्होंने अप्रत्याशित तौर पर फिल्मफेयर में बेस्ट एक्टर का नामांकन भी प्राप्त किया और उन्हें ‘अमर अकबर एंथोनी’ के लिए यह पुरस्कार मिला भी।

1978 में उनकी चार फिल्मों ‘गंगा की सौगंध’, ‘डॉन’, ‘त्रिशूल’ और ‘मुकद्दर का सिकन्दर’ ने बॉक्स आफिस पर सबसे ज्यादा कमाई की। अमिताभ बच्चन की इस सफलता को देख कर फ्रेंच निर्देशक फ्रांकोइस त्रुफां ने उन्हें वन मैन इंडस्ट्री की उपाधि दी। 1979 में उन्होंने ‘मिस्टर नटवरलाल’ के लिए गीत गाया और बतौर गायक और अभिनेता फिल्मफेयर का नामांकन भी पाया। 1982 में ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान जब अमिताभ बच्चन घायल हुए तो पूरा देश उनके लिए दुआएं मांगता दिखा। उस सीन को करते हुए उनकी जन पर बन आयी थी।

तत्कालीन प्रधानमंत्री द्वारा उन्हें देखने के लिए जाने पर यह खबर पूरे विश्व में चर्चित हुई। ‘कुली’ को इसका भरपूर फायदा मिला। फिल्म सुपर हिट साबित हुई। पर लोगों के इस चहेते अभिनेता के करियर में 1984 से पतन का कीड़ा लगना शुरू हो गया। 1984 में वह चुनाव मैदान में उतरे और उन्होंने इलाहाबाद सीट भी जीती, लेकिन जल्द ही उन पर घोटालों के आरोप लगने लगे। इनमें एक बोफोर्स तोप सौदा भी था। मीडिया जिसने कभी अमिताभ बच्चन को सुपर स्टार, मेगा स्टार, वन मैन इंडस्ट्री आदि की उपाधियां दी थीं, उनके हाथ धोकर पीछे पड़ गया। मीडिया से खुन्नस खाये अमिताभ बच्चन ने अपनी भड़ास मिटाने के लिए ‘मैं आजाद हूं’ जैसी फिल्म की, मगर हॉलीवुड की फिल्म ‘मीट जॉन डो’ पर आधारित इस फिल्म को दर्शकों ने नकार दिया।

इसके बाद अमिताभ बच्चन की फ्लॉप फिल्मों का सिलसिला शुरू हो गया। हालांकि इस दौरान उन्होंने ‘शहंशाह’ और ‘हम’ जैसी कुछ सफल फिल्में भी दीं। ‘अग्निपथ’ के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। ‘खुदा गवाह’ के बाद अमिताभ ने खुद को फिल्मों से अलग कर लिया। 1996 में अमिताभ ने एबीसीएल की स्थापना की। उनका लक्ष्य एबीसीएल को एक अरब की कंपनी बनाना था। यह कंपनी  फिल्म निर्माण, संगीत उद्योग और फिल्म से जुड़े कामकाज करती, जिसकी पहली ही फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ बुरी तरह से फ्लॉप हुई।

‘मृत्युदाता’ भी धड़ाम से गिरी। उनकी अगुवाई में एबीसीएल ने 1996 का मिस वल्र्ड ब्यूटी कॉन्टेस्ट बेंगलुरू में करवाया, जिसमें कंपनी को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसी बीच अमिताभ बच्चन ने ‘बड़े मियां छोटे मियां’ जैसी हिट फिल्म दी तो ‘लाल बादशाह’ और ‘हिन्दुस्तान की कसम’ जैसी सुपर फ्लॉप फिल्में भी दीं। एक समय ऐसा लगा कि अमिताभ जिस चीज को हाथ लगाएंगे, वह मिट्टी में मिल जाएगी। पर इस मेगा स्टार को अस्त होने से बचाया स्टार प्लस ने, जो जीटीवी और सोनी टीवी की लोकप्रियता से परेशान था।

स्टार प्लस ने वर्ष 2000 में ब्रिटिश  टेलीविजन शो ‘हू वॉन्ट्स टु बी ए मिलियनेयर’ की नकल पर एक भारतीय गेम शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ बनाने का इरादा किया। कमान सिद्धार्थ बसु के हाथ में थी और उन्होंने केबीसी की हॉट सीट पर अमिताभ बच्चन को बिठाया। उस दौर में फिल्मों के सामने भी टीवी की चुनौतियां बढ़ रही थीं। यही कारण था कि जब अमिताभ टीवी पर आये तो लोगों ने उन्हें फिर से वही सुपरस्टार वाला प्यार दिया।
केबीसी की सफलता से अमिताभ बच्चन फिर से लोकप्रियता के शिखर पर ज बैठे। इसी शो के माध्यम से उनकी कंपनी एबीसीएल घाटे से उबर पायी और अमिताभ दिवालिया होने से बच सके।

उन्होंने इस शो को वर्ष 2005 तक होस्ट किया। बेशक उन्होंने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के जरिये टीवी एंकरिंग को एक नया अंदाज दिया था। इस शो की खासियत थी बिग बी की शुद्ध हिन्दी और उनका प्रतिभागियों के प्रति दोस्ताना अन्दाज। उनको देख गोविन्दा,  शाहरुख खान, सलमान खान जसे न जने कितने ही सितारे टीवी पर एंकर बन बैठे, जो सिलसिला आज भी कायम है। अमिताभ ने दुनिया को दिखाया कि कैसे लड़खड़ाते हुए संभला जता है।

अब कलर्स चैनल ने अमिताभ बच्चन को भुनाने की कोशिश की है। लंबे अर्से बाद अमिताभ कलर्स पर प्रसारित होने वाले ‘बिग बॉस 3’ में बतौर एंकर आ रहे हैं, लेकिन जिस अंदाज में शो को लॉन्च किया गया है, उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि उनकी भूमिका महज एक एंकर की नहीं है। इस शो में वह सप्ताह में दो दिन दिखाई देंगे। प्रतियोगियों के बाहर होने के बाद वह उनसे रु-ब-रू होंगे और उनका अनुभव दर्शकों के साथ बांटेंगे। उनका अंदाज ही शो की टीआरपी निर्धारित करेगा। अमिताभ के माध्यम से ही शो के निर्माताओं ने घोषणा की है कि वह इस शो की टीआरपी को दूसरे शोज के लिए मिसाल के रूप में कायम करेंगे। इसके अलावा अमिताभ बच्चन के पास फिलहाल सात फिल्में हैं, जिसमें से फिल्म ‘अलादीन’ जल्द ही रिलीज होने वाली है। इसके अलावा उनके पास ‘तीन पत्ती’,  ‘रण’, ‘शू बाइट’, ‘कुणाल अवदना’, ‘चेनाब गांधी’ और ‘बुद्धम शरणम गच्छामि’ भी हैं। फिल्म ‘तीन पत्ती’ में वह अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त अभिनेता सर बेन किंग्स्ले के साथ दिखाई देंगे।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सिल्वर स्क्रीन पर चालीस साल