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कॉमनवेल्थ

ब्रिटेन के गुलाम रह चुके देशों को कॉमनवेल्थ के नाम से जाना जाता है। यह 53 देशों का समूह है। इसका मुख्यालय लंदन में है। इसका मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र, साक्षरता, मानवाधिकार, बेहतर प्रशासन, मुक्त व्यापार और विश्व शांति को बढ़ावा देना है। इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय प्रत्येक चार वर्ष में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों और बैठक में भाग लेती हैं।

कॉमनवेल्थ ऑफ नेशंस की स्थापना 1931 में हुई थी, लेकिन इसका आधुनिक स्वरूप 1947 में भारत और पाकिस्तान के आजाद होने के बाद सामने आया। कॉमनवेल्थ देशों का कोई संविधान या चार्टर नहीं है। इसके प्रमुखों की प्रत्येक दो वर्ष में एक बार बैठक होती है। भारत सहित एंटीगुआ, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, ब्रुनेई, कनाडा, साइप्रस, घाना आदि इसके सदस्य हैं। जिम्बाब्वे को 2002 में कॉमनवेल्थ की सदस्यता से हटाया गया था और 2003 में यह प्रतिबंध अनिश्चित काल तक बढ़ाया गया था।

कॉमनवेल्थ समूह के देशों की कुल आबादी 1.9 अरब है, जो विश्व की आबादी की एक-तिहाई है। फिजी को कॉमनवेल्थ समूह से 2000-01 में प्रतिबंधित किया गया था, उसके बाद पुन: उस पर 2006 में प्रतिबंध लगा। नाइजीरिया को 1995 से 1999 तक से प्रतिबंधित किया गया। पाकिस्तान पर 1999 में प्रतिबंध लगा था।

संरचना : लंदन घोषणा के तहत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय राष्ट्रमंडल देशों के समूह की प्रमुख होती हैं। कॉमनवेल्थ सचिवालय की स्थापना 1965 में हुई थी। इसके महासचिव मुख्य कार्यकारी के तौर पर काम करते हैं। वर्तमान में कमलेश शर्मा इसके महासचिव हैं। उनका चयन नवंबर, 2007 को हुआ। इसके पहले महासचिव कनाडा के आर्नल्ड स्मिथ थे।

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