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एक करोड़ 22 लाख खो देते हैं आंखों की रोशनी

हर साल मोतियाबिंद की चपेट में करोड़ों लोग आते हैं। जिनमें से एक करोड़ 22 लाख लोग ऐसे होते हैं, जो हमेशा के लिए अपनी आंखों की रोशनी खो देते हैं। समय पर इलाज न करवाने के चलते उन्हें आगे का जीवन बगैर रोशनी के काटना पड़ता है। मोतियाबिंद के लक्षण सामने आते ही अगर उसका इलाज शुरू कर दिया जाए तो इस बीमारी को खत्म किया जा सकता है। यह बातें एसीएमओ डॉ. पीके सिंह ने सेक्टर-27 स्थित आई केयर हॉस्पिटल में गुरुवार को आयोजित सेमिनार के दौरान कहीं।

सेमिनार के दौरान बताया गया कि पचास साल की उम्र तक आते-आते मोतियाबिंद की संभावना बढ़ने लगती है। इस दौरान स्कूलों में वाद विवाद, चित्रकला व चर्चाओं का आयोजन होगा। विभिन्न प्रतियोगिताओं का विषय आंखों की सुरक्षा से संबंधित होगा। इसमें मोतियाबिंद, उम्र बढ़ने के साथ आंखों की सुरक्षा व होने वाले रोगों के बारे में बच्चों अपने विचार रखेंगे। सेमिनार में हॉस्पिटल के चेयरमैन डॉ. सुशील चौधरी सहित कई लोग मौजूद थे।

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