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गढ़वाल में हर चौथा छात्र फर्जी

छात्रों-शिक्षकों की पड़ताल के दौरान गढ़वाल मंडल की स्याह तस्वीर सामने आई है। मंडल में 26 प्रतिशत बच्चे ‘मिसिंग’ पाए गए हैं। हरिद्वार में तमाम कोशिश के बावजूद 35 प्रतिशत छात्र-छात्रओं का पता नहीं लग सका। स्कूलों में आर्थिक घोटाले की राशि भी अनुमान से कहीं अधिक होती दिख रही है।

शिक्षकों-छात्रों की पड़ताल के अभियान में अभी तक जो रिपोर्ट शासन को मिली है उससे साफ लग रहा है कि शिक्षा के मंदिरों में भ्रष्टाचार की गंदगी फैली हुई है। गढ़वाल मंडल के जिलों में फर्जी बच्चों का प्रतिशत पूर्व में लगाए गए अनुमान से अधिक होता दिख रहा है। हरिद्वार में 35 प्रतिशत बच्चे स्कूलों में नहीं हैं।

दून में यह आंकड़ा 24 प्रतिशत है। पौड़ी और उत्तरकाशी की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। इन दोनों जिलों में क्रमश: 17 और 18 प्रतिशत बच्चे नहीं मिले हैं। रुद्रप्रयाग में छह और चमोली में दस प्रतिशत बच्चे निरीक्षण के वक्त स्कूलों में नहीं थे। पूरे मंडल का आंकड़ा यह है कि जिन स्कूलों में 91351 बच्चे होने चाहिए थे वहां 71 हजार से भी कम बच्चे मौके पर मिले।

26 प्रतिशत की मिसिंग को मिड डे मील, स्कॉलरशिप, किताबों के सेट और बच्चों को मिलने वाली अन्य सुविधाओं के संदर्भ में परखें तो स्कूलों का घोटाला महज तीन करोड़ तक सीमित नहीं रहेगा। सचिव डॉ. राकेश कुमार का कहना है कि जांच में जो चीजें सामने आ रही हैं वे काफी गंभीर हैं। मैदानी जिलों में स्थिति ज्यादा खराब है।

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