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एससी-एसटी के लिए नियमों में शिथिलता

जीविका अवसर प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के लाभार्थियों के लिए नियमों को शिथिल किया गया है। इसके तहत बेरोजगारों को दिए जाने वाले प्रशिक्षण में तय धनराशि की बाध्यता समाप्त कर दी गई है। पहले कुल सहायता की मात्र 10 प्रतिशत धनराशि ही प्रशिक्षण में व्यय की जा सकती थी। इसके अलावा योजना की लगातार समीक्षा भी की जाएगी।

एससी-एसटी लाभार्थियों को स्वरोजगारी बनाने के लिए प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। लघु अवधि प्रशिक्षण छह महीने का व दीर्घ अवधि प्रशिक्षण की अधिकतम अवधि एक साल रहेगी। कौशल आधारित प्रशिक्षण के तहत तकनीकी व व्यवसायिक प्रशिक्षण भी शामिल किए जाएंगे। प्रशिक्षण के लिए लाभार्थियों की न्यूनतम संख्या 20 होनी चाहिए।

इसके अलावा लाभार्थी वर्क शैड आदि अवस्थापना सुविधाओं के लिए 50 हजार तक का ऋण ले सकते हैं। यह ऋण चार प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर पर दिया जाएगा। इसे लाभार्थी 60 समान किस्तों में दे सकते हैं। समाज कल्याण सचिव मनीषा पंवार के मुताबिक योजना में आ रही कुछ व्यवहारिक दिक्कतों को देखते हुए संशोधन किए गए हैं।

इससे अनुसूचित जाति-जनजाति के लाभार्थियों को काफी लाभ मिलेगा। उनके मुताबिक ऐसे लाभार्थियों को विभिन्न प्रदर्शनियों में भाग लेने के लिए ढुलान व स्टॉल किराए की पचास प्रतिशत धनराशि दी जाएगी। राज्य स्तरीय प्रदर्शनियों में इसकी अधिकतम सीमा 5000 व राज्य से बाहर के लिए दस हजार रुपए की गई है। यह सहायता लाभार्थी को एक ही बार दी जा सकेगी।

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