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फार्मा क्लस्टर योजना ने थामा उद्योगों को

सिडबी की मदद से चल रही फार्मा क्लस्टर योजना ने फार्मा उद्योगों को राज्य में ही रोके रखने में मदद की है। इस योजना के लागू होने के बाद राज्य में स्थापित 350 फार्मा यूनिटों को देश की अन्य इकाईयों के मुकाबले में प्रतिस्पर्धा के लिए खड़ा किया जा सकेगा। राज्य में आटो मोबाइल के बाद सबसे अधिक फार्मा इकाईयां आई हैं। इनमें करीब 350 बड़ी से लेकर छोटी और लघु इकाइयां स्थापित हुई हैं। हरिद्वार, भगवानपुर रुड़की, सेलाकुंई में इन यूनिटों की संख्या सबसे अधिक है।

पहले फार्मा यूनिटों के लिए एक्साइज डय़ूटी 16 से 12 प्रतिशत थी। लेकिन अब यह चार प्रतिशत तक पहुंच गई है। इससे फार्मा उद्योगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। वजह इन उद्योगों को कच्चा माल बाहर से ही मंगाना पड़ता है। लेकिन सिडबी की मदद से राज्य में शुरू की गई फार्मा क्लस्टर योजना ने उद्योगों को यहां से जाने से रोक दिया।

अन्य राज्यों के मुकाबले उत्तराखंड में इन उद्योगों के लिए पारिस्थिकीय वातावरण, कानून व्यवस्था की स्थिति व बिजली की अधिक समय तक उपलब्धता बेहतर है। अपर निदेशक उद्योग सुधीर चंद्र नौटियाल के मुताबिक इस योजना से इन उद्योगों को बेहतर व अधिक उत्पादन के साथ ही गुणवत्ता के लिए प्रशिक्षण व टेस्टिंग की सुविधा संयुक्त रूप से उपलब्ध कराई जाएगी।

इससे  राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय बाजार में फार्मा यूनिटें प्रतिस्पर्धा में खड़ी हो सकेंगी। साथ ही इन उद्योगों को यंत्रों को अत्याधुनिक करने को परामर्श भी दिया जाएगा। आईटी के जरिए  भी इन्हें अपडेट किया जाएगा। इसके लिए सिडबी की सहायता से आंध्रा इंडस्ट्रियल एंड टेक्निकल कन्सलटेंसी आर्गेनाइजेशन मदद करेगा। उद्योग विभाग भी समन्वय स्थापित कर इन्हें सहयोग करेगा। दो साल की इस योजना के तहत 1.25 करोड़  प्रशिक्षण पर खर्च होंगे। 

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