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आईटीआई की दशा सुधारेंगे उद्यमी

केंद्र सरकार के सहयोग से राज्य के नौ आईटीआई को पीपीपी मोड में उच्चीकृत किया जाएगा। प्रत्येक आईटीआई के लिए केंद्र सरकार ने 2.50 करोड़ की स्वीकृति दी है। ये सभी आईटीआई एनसीवीटी से संबद्ध होंगे।  केंद्र सरकार के श्रम सेवा मंत्रलय ने वर्ष 2009-10 के लिए राज्य के नौ आईटीआई को पीपीपी मोड में संचालित कर इनके उच्चीकरण की मंजूरी दी है।

श्रम व सेवायोजन सचिव दिलबाग सिंह ने बताया कि इसके लिए मैदान के चार और पहाड़ के पांच आईटीआई का चयन किया गया है। इनमें ब्राइटर्स कारनर अल्मोड़ा, कांडा बागेश्वर, थलीसैंण पौड़ी, देवप्रयाग व चमियाला टिहरी गढ़वाल व मैदानी क्षेत्र में जसपुर, गदरपुर ऊधमसिंह नगर व पिरान कलियर हैं। इन प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री की मंजूरी अभी मिलनी है। उन्होंने बताया कि पीपीपी मोड में संचालित करने के लिए उद्योगपतियों से आवेदन मांगे गए हैं।

निदेशक प्रशिक्षण व सेवायोजन कार्यालय के जरिए उद्योगों को आमंत्रित कर इनका अंतिम चयन इंड्स्ट्री मैनेजमेंट कमेटी द्वारा किया जाएगा। इसी कमेटी की देखरेख में ये आईटीआई संचालित होंगे। संबंधित औद्योगिक समूह से ही इसका अध्यक्ष चुना जाएगा। संबंधित आईटीआई का प्रधानाचार्य इसका सदस्य सचिव होगा। जो भी औद्योगिक इकाई जिस आईटीआई को पीपीपी मोड में लेगी, वह अपने उद्योग के हिसाब से युवाओं को प्रशिक्षण दे सकती है।

केंद्र से मिलने वाली राशि से इनमें साज सज्जा, उपकरण व अत्याधुनिक मशीनें स्थापित की जाएंगी। राज्य सरकार चयनित आईटीआई पर केवल मानिटरिंग ही करेगी। पीपीपी मोड में उच्चीकृत होने के बाद इनमें मैनेजमेंट का 20 प्रतिशत कोटा भी निर्धारित हो जाएगा। यानि 80 प्रतिशत सीटें ही राज्य सरकार भर सकती है।

बिजनेस पार्टनर 20 प्रतिशत सीटों के लिए फीस का निर्धारण भी स्वयं करेंगे। साथ ही वे अपने उद्योगों की सुविधा के हिसाब से पुराने कोर्सो के स्थान पर अत्याधुनिक कोर्स शुरू कर सकते हैं। लेकिन इसमें सबसे अच्छी बात यह है कि उत्तराखंड में स्थापित उद्योगपति ही इन आईटीआई को पीपीपी मोड में संचालित करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

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