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पुलिस की लापरवाही,नवविवाहिता की मृत्यु,थानाध्यक्ष निलंबित,

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक नववविवाहिता की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है जिनकी लापरवाही की वजह से युवती की कथित रूप से मौत हुई है।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। गौरव नाम के युवक ने अदालत में दायर याचिका में कहा था कि उसने और मोनिका ने परिवार वालों की मर्जी के खिलाफ इस वर्ष जुलाई में आर्य समाज मंदिर में शादी की थी।


 गौरव ने उत्तर प्रदेश पुलिस पर आरोप लगाया कि उसने सारे सबूतों को दरकिनार करते हुए मोनिका के परिजनों की शिकायत पर उसे नाबालिग लड़की के अपहरण के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। लेकिन अदालत में पेश होकर मोनिका ने इन आरोपों को गलत बताया जिसके बाद गौरव को जमानत मिली। गौरव ने बाहर आकर मोनिका से संपर्क करने की काफी कोशिश की लेकिन उनके नाकाम रहने के बाद गौरव ने दिल्ली उच्च न्यायालय से गुहार लगाई की वह दिल्ली पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस को उसकी नवविवाहित पत्नी को प्रस्तुत करने का निर्देश दे।
 उच्च न्यायालय ने मामले पर सुनवाई की और उत्तर प्रदेश पुलिस को सात अक्टूबर तक उस युवती को अदालत में पेश करने का आदेश दिया। लेकिन कल न्यायालय में गाजियाबाद की पुलिस सहायक अधीक्षक हैप्पी गुप्तन ने बताया कि गत 17 सितंबर को मोनिका की बीमारी से मौत हो गई। गुप्तन ने यह भी कहा कि पति के खिलाफ गलत धाराओं के तहत मामला दर्ज के लिए थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया गया है और अन्य अधिकारियों का तबादला किया गया है।


 सहायक पुलिस अधीक्षक ने अदालत को आश्वासन दिया कि याचिकाकर्ता की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और युवती के परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज करके पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी से मामले की जांच कराई जाएगी। न्यायाधीशों ने माना कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने लड़की की आयु की जांच किए बिना परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर गलत तरीके से गौरव को गिरफ्तार किया था।

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