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जरूर लाएं मिठाई

जरूर लाएं मिठाई

बच्चों ने एक नारा बना रखा है, ‘दीवाली आई, मिठाई लाई।’ यूं तो दीपावली का नाता और बहुत सी बातों से जुड़ा हुआ है, लेकिन मिठाई से इसका रिश्ता कुछ अधिक ही घनिष्ठ है। वास्तविकता तो यह है कि दीपावली को दीपों से कहीं अधिक मिठाइयों एवं उपहारों के तौर पर ही जाना जाता है। आज दिल्ली और एनसीआर अर्थात् नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव आदि से लेकर मथुरा, आगरा, सोनीपत, पानीपत आदि सभी स्थानों पर एक से एक मिठाई वाला मौजूद है।

मिठाइयों की तैयारी
यूं तो दीपावली की मिठाइयों की तैयारी कई महीने पूर्व ही शुरू हो जाती है, मगर अलग-अलग मिठाई वालों का अपना अलग-अलग स्टाइल होता है। कोई-कोई तो दीपावली से दो मास पूर्व मिठाइयों की तैयारी शुरू कर देते हैं, जैसे-लॉरेन्स रोड ए1 ब्लॉक में ‘काका स्वीट्स’। बकौल इसके मालिक, यहां पर दीपावली की मिठाइयों की तैयारियां लगभग तीन मास पूर्व शुरू हो जाती हैं, जिसका कारण है कि नाना प्रकार के मेवे जैसे- पिस्ता, नारियल, गुरबन्दी बादाम, मीठी किशमिश आदि का सीधे काबुल से सस्ते दामों में खरीदना। कई बार होता यह है कि दिल्ली में आने वाले काबुल के पठान यहां पर मिलने वाले बढ़ियां एवं महंगे मेवे को बहुत सस्ते दामों पर बेच देते हैं। चूंकि उनके अनुसार खारी बावली की किराना मण्डी से अच्छे दाम मिठाई वाले देते हैं तो वे अपने ड्राई फ्रूट यहां सेल कर देते हैं।

ड्राई फ्रूट की सफाई एवं कटाई पर काफी हद तक दारोमदार रहता है मिठाई के बढ़िया स्वाद का। इसी प्रकार से हम जब आगे सी-7 ब्लॉक में जाएंगे और ‘चौधरी स्वीट्स’ के अन्दर साफ-सुथरी एवं नफासत से लगी मिठाइयों को देखेंगे तो दिल में आएगा कि तुरंत मुख में रख लो। चौधरीजी का कहना है कि आजकल मिठाइयों में बड़ा कॉम्पिटीशन हो गया है, क्योंकि सभी बढ़िया मिठाई बनाते हैं। तो हमें न केवल उस स्टैण्डर्ड को बना कर रखना होता है, बल्कि उससे भी बढ़िया टेस्ट बनाना होता है।

‘नत्थू स्वीट्स’ की कई स्थानों पर दुकानें हैं, जैसे-बंगाली मार्केट, फ्रैंड्स कॉलोनी कम्युनिटी सेंटर, लक्ष्मी नगर, सुन्दर नगर, ओखला आदि। यहां पर हमें दुकान के मालिक विपिन एस. गुप्ता मिले, जिन्होंने बताया कि वैसे तो मिठाई हम एक दिन पहले ताजी तैयार करते हैं, मगर मेवे की करवा चौथ के तुरंत बाद ही सफाई एवं कटाई शुरू हो जाती है।

विपिन ने बताया कि और ब्राण्डों से उनकी मिठाई थोड़ी सी अधिक महंगी इस कारण होती है, क्योंकि वे खोये, काजू, पिस्ता, बादाम आदि के फैन्सी आइटम भी बनाते हैं। इसके अतिरिक्त वे गुलाब जामुन बनाने के लिए आगरा से विशेष धाप मंगाते हैं। नत्थू स्वीट्स में ‘इण्डाना’ का देसी घी प्रयोग किया जाता है। उनके यहां खोए के फैन्सी आइटम 400 से 480 रुपये तक मिलते हैं।

‘तिवारी स्वीट्स’ के मालिक रविकांत ने बताया कि दीपावली पर विशेष रूप से उनके यहां डोडा बर्फी, आटे व बेसन के लड्डू, पतीसा, कलाकंद आदि के अतिरिक्त छैने की मिठाइयों की बड़ी डिमांड होती है। इन्दिरापुरम में ‘अग्रवाल स्वीट्स’ के मालिक बताते हैं कि उनके यहां भी लगभग एक मास पूर्व से ही दीपावली की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। उनके यहां घी अपनी निजी डेरी से ही आता है।

रॉयल क्षिप्रा टावर मॉल में उप्रेती बेकरी वाले भी मिठाइयों की तैयारियां लगभग डेढ़ मास पूर्व ही प्रारंभ कर देते हैं। उनके केक, पेस्ट्रियों आदि के दीपावली गिफ्ट पैक आज न केवल इन्दिरापुरम, गाजियाबाद, नोएडा बल्कि डासना एवं मसूरी (गाजियाबाद वाला) तक मशहूर हैं। यहां पर भी दीपावली के बड़े सुन्दर आकारों में गिफ्ट पैक बनाए जाते हैं, जो कई दिन तक ठहर सकते हैं। उनका कहना है कि वे स्वास्थ्य को न बिगाड़ने वाले ‘प्रिजरवेटिव’ ही डालते हैं।

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