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मीडिया और विरोधी दलों पर माया सरकार की भौंहें तनीं

मीडिया और विरोधी दलों पर माया सरकार की भौंहें तनीं

उत्तर प्रदेश सरकार ने मीडिया और विरोधी दलों पर राजधानी में दलित महानायकों की मूर्तियों एवं स्मारकों के निर्माण के बारे में सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के निर्णय को गलत ढंग से उद्धत करके भ्रामक खबरें छापने और बयानबाजी करने का आरोप लगाते हुए बुधवार को यहां कहा कि ऐसा करने वालों के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला बनता है और सरकार इस संबंध मे उचित कार्यवाही कर सकती है।
    
उत्तर प्रदेश सलाहकार परिषद के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट में सरकार के अधिवक्ता सतीश चन्द्र मिश्र ने बुधवार को आरोप लगाया कि खबरें छापने से पहले मीडिया और बयानबाजी करने से पहले कांग्रेस तथा अन्य विरोधी दलों के नेताओं ने अदालत के आदेश को देखने एवं समझने तक की जरूरत नहीं समक्षी और भ्रामक बयानबाजी करके मुख्यमंत्री एवं प्रदेश सरकार की छवि बिगाड़ने की कोशिश शुरू कर दी।
    
उन्होंने कहा कि मीडिया ने अदालत की टिप्पणियों के आधार पर खबरें छापीं और राजनीतिक दलों के नेताओं ने भ्रामक बयानबाजी की, जबकि बहस के दौरान की गई टिप्पणियां आदेश का हिस्सा नहीं होतीं।    

मिश्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस तथा अन्य विरोधी दलों के भ्रामक बयान अदालत को पूर्वाग्रह से ग्रसित करने की कोशिश के रूप में देखे जा सकते हैं और इससे अदालत की अवमानना का मामला बनता है, जिसके बारे में सरकार कार्यवाही करने पर विचार कर सकती है।
    
यह दोहराते हुए कि सरकार अदालत के निर्णय का सम्मान करती है और अदालत में दी गयी अंडरटेकिंग (वचन) का अक्षरश: पालन किया गया है। मिश्र ने कहा कि आठ सितम्बर को ही उन सभी निर्माण स्थलों पर निर्माण कार्य रोक दिया गया था जो कि अदालत में दाखिल जनहित याचिकाओं की परिधि में आते हैं।
    
प्रदेश के मुख्य सचिव अतुल कुमार गुप्ता को अदालत की अवमानना के आरोप में मिली नोटिस के बारे में मिश्र ने कहा कि अदालत ने प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला माना है और चार नवम्बर को मुख्य सचिव अदालत मे अपना पक्ष रखेंगे जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी ।
 
मिश्र ने कांग्रेस समेत सभी विरोधी दलों के नेताओं को भ्रामक बयानबाजी करके मुख्यमंत्री मायावती एवं प्रदेश सरकार की छवि बिगाड़ने का कुत्सित प्रयास करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके विरुद्ध मानहानि की कार्यवाही करने पर विचार कर रही है।
    
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश सरकार के विरद्ध संविधान की धारा 356 के तहत कार्यवाही किए जाने की मांग के बारे में विरोधी दलों के नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए मिश्र ने कहा कि अदालत के समक्ष एक विचाराधीन मामले मे भ्रामक बयानबाजी करके अदालत की अवमानना करने वाले नेताओं को ऐसी मांग करने से पहले संविधान और कानून को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
   
दलित महापुरुषों की मूर्तियों एवं स्मारकों पर सरकारी खजाने के खर्च के लिये कांग्रेस और विरोधी दलों द्वारा बसपा सरकार की आलोचना को उनकी दलित विरोधी मानसिकता का प्रमाण बताते हुए मिश्र ने कहा कि कांग्रेसी सरकारों ने गांधी नेहर परिवार के नाम पर देश के कोने-कोने में हजारों करोड़ रुपए खर्च करके मूर्तियां एवं स्मारक बनवाये जबकि प्रदेश सरकार ने दलित महापुरषों की मूर्तियों एवं स्मारकों पर बजट का एक प्रतिशत से भी कम खर्च किया है।

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  • Web Title:मीडिया और विरोधी दलों पर माया सरकार की भौंहें तनीं