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बापू का जोहानिसबर्ग मकान हाथ से निकलने से भारत निराश

बापू का जोहानिसबर्ग मकान हाथ से निकलने से भारत निराश

सरकार ने महात्मा गांधी के जोहानिसबर्ग मकान के सूथेबी नीलामी घर के जरिये एक फ्रांसीसी कंपनी के हाथ में चले जाने पर बुधवार को निराशा जतायी लेकिन कहा कि वह एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के जरिये इस विरासत संपत्ति को हासिल करने के प्रयास जारी रखेगी।

कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि यह राष्ट्रीय भावनाओं से जुड़ा मामला है और मैं इस ऐतिहासिक संपत्ति को हासिल करने और इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करवाने के लिए कोई भी प्रयास बाकी नहीं रखूंगा। कोयला मंत्रालय के तहत आने वाले कोल इंडिया लि़ ने इस मकान को हासिल करने के लिए इसके स्वामी से संपर्क किया था। राष्ट्रपिता एक शताब्दी पहले इस मकान में रहते थे।
   
जायसवाल ने कहा कि मंत्रालय ने सीआईएल के जरिये मकान के विक्रेताओं से संपर्क किया था और वह उनके मुताबिक कोई भी राशि चुकाने को तैयार था। बातचीत जारी थी लेकिन दुर्भाग्यवश एक महीने की समयसीमा दिये जाने के बावजूद उन्होंने हमसे संपर्क नहीं किया।
   
उन्होंने कहा कि सीआईएल निदेशक मंडल ने यह तय किया है कि इस मकान को हासिल करने के मकसद से धन जुटाने के लिए इसके कर्मचारी अपने एक दिन का वेतन देंगे।  मैं पहले ही घोषणा कर चुका हूं कि मैं अपने एक माह का वेतन दूंगा तथा और धन जुटाने के प्रयास करूंगा।
   
माना जाता है कि पेरिस स्टाक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कंपनी वायजेयू द मांड ने जोहानिसबर्ग के उपनगरीय क्षेत्र स्थित  द कराल  नामक इस मकान को बिक्री के लिए मांगे गये तीन लाख 77029 डालर के दाम से दुगनी कीमत चुकाकर इसे हासिल किया है।

पुरानी शैली के खपरैल की छत वाले इस मकान में युवा वकील मोहनदास कर्मचंद गांधी 1908 से 1910 के बीच रहे थे। इस मकान की डिजाइन महात्मा गांधी के विश्वस्त और आर्किटेक्ट हर्मन कालेनबाक ने तैयार की थी। जायसवाल ने बताया कि इस साल अगस्त में दक्षिण अफ्रीका की यात्रा के दौरान उन्होंने इस मकान का मुआयना किया था।

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