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भारतीय मूल की सामाजिक कार्यकर्ता को प्राइड ऑफ ब्रिटेन पुरस्कार

भारतीय मूल की सामाजिक कार्यकर्ता को प्राइड ऑफ ब्रिटेन पुरस्कार

मजबूरी में होने वाले विवाह के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने को लेकर ब्रिटेन सरकार को प्रेरित कर देने वाला अभियान चलाने के लिये पहचानी जाने वाली भारतीय मूल की एक कार्यकर्ता को प्रतिष्ठित प्राइड ऑफ ब्रिटेन पुरस्कार मिला है।

जसविंदर संघेरा को 15 वर्ष की उम्र में विवाह करने के लिये मजबूर किया गया था। इसी के चलते उन्होंने घर छोड़ दिया था। जसविंदर को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिये मंगलवार रात एक भव्य समारोह में यह पुरस्कार दिया गया।

जसविंदर पंजाब से पचास के दशक में ब्रिटेन आयी थीं। उन्होंने 1993 में डर्बी में कर्म निर्वाण परमार्थिक संस्थान की स्थापना की ताकि मजबूरी में विवाह के कारण या परिवार के सम्मान के नाम पर होने वाली हिंसा के शिकार लोगों की मदद की जा सके। उनकी बड़ी बहन रूबिना ने भी मजबूरी में विवाह से बचने के लिये 1983 में खुदकुशी कर ली थी।
   
मजबूरी में होने वाले विवाह के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने के लिये ब्रिटेन सरकार को प्रेरित करने में 44 वर्षीय जसविंदर की प्रमुख भूमिका रही है। अब विदेश तथा राष्ट्रमंडल कार्यालय में इस तरह के विवाह के मामलों के लिये एक अलग इकाई बनायी गयी है जिसके पास हर वर्ष पीड़ितों से करीब पांच हजार फोन कॉल आते हैं। इस इकाई के पास आने वाले कुल मामलों में से करीब 65 फीसदी पाकिस्तानी मुस्लिमों के होते हैं। 30 फीसदी मामले नाबालिगों से और 15 फीसदी मामले लड़कों या पुरुषों से जुड़े होते हैं।

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  • Web Title:भारतीय मूल की सामाजिक कार्यकर्ता को प्राइड ऑफ ब्रिटेन पुरस्कार