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राजघाट समाधि परिसर का ‘सीवर’ सील

राजघाट समाधि परिसर में एक माह से बह रहा सीवर सील कर दिया गया। इस सीवर ने सीपीडब्लूडी और जल बोर्ड टीम को कई दिनों तक उलझाए रखा। पता ही नहीं चल रहा था कि गंदा पानी कहां से आ रहा है। गांधी जयंती पड़ी, उस दिन भी सीवर समाधि परिसर में बहता रहा। 

‘हिन्दुस्तान’ ने 2 अक्तूबर के अंक में परिसर में बने सीवर का समाचार प्रकाशित किया। 3 अक्तूबर से जल बोर्ड की टीम हरकत में आ गई। चार दिनों की मेहनत के बाद बुधवार को सीवर सील कर दिया। स्थाई समाधान के लिए परिसर के बाहर काम किया जाना बाकी है।

एक माह पूर्व राजघाट समाधि परिसर के रिंगरोड प्रवेश द्वार की तरफ स्थित प्याऊ के पास गंदा पानी जमा होने लगा था। समाधि परिसर में रख-रखाव का काम सीपीडब्लूडी देखती है। जमीन में जिस स्थान से गंदा पानी आ रहा था, वहां सीपीडब्लूडी टीम ने खुदाई की, लेकिन स्नोत नहीं दिखा। खुदाई राजघाट सर्विस रोड बाउंड्री तक की गई। परिसर में गंदे पानी से भरे नाले (सीवर) जैसी स्थिति बन गई।

आशंका जताई गई कि रिंगरोड सीवर या किसी ड्रेन से लीकेज है। इसके बाद जल बोर्ड की टीम सक्रिय हुई। खुदाई में एक कम व्यास वाली पाइप मिली। मंगलवार को इसे ब्लॉक किया गया, कमजोर होने के कारण पाइप टूट गया।
टीम ने पाइप के आगे स्थित एक चेंबर में पंप लगाकर पानी निकाला, इसके बाद परिसर में गंदा पानी आना बंद हो गया। जल बोर्ड के जेई अजहर आलम ने बताया कि परिसर में पानी नहीं आए, इसके लिए पाइप सील कर दिया गया है। संभावना जताई जा रही है कि ड्रेनेज लाइन से पानी आ रहा था।

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