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जाट आरक्षण की जंग आखिर ले ही आई रंग

दिल्ली सरकार ने भले ही ‘जाट’ बिरादरी  को ओबीसी के तहत आरक्षण दे दिया हो, लेकिन दिल्ली पुलिस इसे मानने को तैयार ही नहीं होती। ऐसे ही एक मामले में दिल्ली पुलिस के सिपाही को एसआई पद की परीक्षा में आरक्षण नहीं दिया गया।

सिपाही ने कैट के समक्ष मामले को रखा। कैट के आदेश के बाद भी उसे आरक्षण नहीं दिया गया। सिपाही ने आदेश की अवमानना का मामला भी  कैट में रखा। इस पर कैट ने एसएससी के चेयरमैन को 8 अक्तूबर को तलब किया। इससे पहले ही एसएससी ने सिपाही का साक्षात्कार करके 6 अक्तूबर को उसके चयन की घोषणा कर दी।

दिल्ली पुलिस में तैनात सिपाही सुनील, ‘जाट’ बिरादरी से संबंध रखता है। उसने एसएससी द्वारा सब इंस्पेक्टर के लिए आयोजित कम्बाइन्ड ग्रेजुएट लेवल एग्जामिनेशन-2004 में सामान्य श्रेणी के तहत आवेदन किया था। उसे बताया गया था कि दिल्ली पुलिस में जाट को ओबीसी के तहत आरक्षण नहीं दिया जाता। यदि भविष्य में ऐसा होगा तो उसे आरक्षण मिलेगा। उसने प्रथम चरण की परीक्षा पास कर ली। मुख्य परीक्षा में उसके नंबर सामान्य श्रेणी के लिए तय किए गए नंबरों से कम, लेकिन ओबीसी के लिए तय नंबर से ज्यादा थे।

जब उसने अधिकारियों से खुद को ओबीसी के तहत मानने की गुहार लगाई तो उन्होंने उसे सामान्य श्रेणी का मानते हुए आवेदन ठुकरा दिया। कैट के समक्ष सिपाही के अधिवक्ता अनिल सिंघल ने दलील दी कि वर्ष 2003 में आयोजित परीक्षा में जाट बिरादरी को अदालत के आदेश के बाद ओबीसी के तहत आरक्षण दिया गया था। इसलिए इस मामले में भी याचिकाकर्ता को आरक्षण मिलना चाहिए।

कैट ने इस दलील को स्वीकारते हुए सुनील को आरक्षण देने का आदेश दिया। शुरूआती दौर में आदेश को नकार रही एसएससी को आखिरकार अपना फैसला बदलना पड़ा। 6 अक्तूबर को निकाले गए परिणाम में सुनील को चयनित घोषित कर दिया गया है।

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