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पर उपदेशक

त्रेतायुग में अपना देश ‘प्राण जाए, पर वचन न जाई’ के लिए जाना जाता था। कलियुग में ‘प्राण जाइ, प्रवचन न जाई’ के लिए पॉपुलर है। प्रवचनधर्मी देश है अपना। यहां ऐसे-ऐसे भाषणी मिलेंगे, जिनका प्रवचन समाप्त होने का नाम नहीं लेगा, चाहे सुनने वाले की जान ही निकल जाए।  ज्यादातर लोग जन्मजात उपदेशक हैं। पेट से ही प्रवचन की पट्टी पढ़कर आते हैं। दूसरों को उपदेश पिलाना इनकी नेचुरल हैबिट्स में है। अपने यहां परोपदेशक बहुत हैं, तभी तो कुशलता की कामना वाली यह कहावत मशहूर है: ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे’।

भाई मेरे, अगर तुम इनसे टकरा गए, तो ये एक कप चाय पिलाएंगे। साथ में पांच लीटर उपदेश बोनस में थमा के दम लेंगे। बचके कहां जाओगे बच्चाू? सड़क पर भागोगे। किसी गाड़ी से चंपोगे। तुम घुटने सहला रहे होगे, यह परोपदेशक आत्मा वहां पर भी टपक लेगी। कहेगी-‘अंधाधुंध तो गाड़ियां चलती हैं। पता नहीं कब कौन किधर से ठोकर मारके निकल ले। पलस्तर घाते में बंधे। अब तो भाई, रोड पर खुद आगे-पीछे देख के चलने की होती है। इतनी बात तो तुमको समझ लेनी थी।’ 

गोया सारी गलती तुम्हारी ही थी। ठोकर मारने वाला तो गाड़ी पर था। ब्रेक फेल हो गया होगा। इतनी तो भीड़ रहती है। ध्यान बंट गया होगा। इतने में एक और परोपदेशक रोड के किनारे से बीच में प्रस्फुटित होगा। वह फरमाएगा-‘लोगों में ट्रैफिक सेंस ही नहीं। भैया, पैदल चलते वक्त बाएं साइड में और वह भी फुटपाथ पर चलने की होती है। जब भी रोड पार करना हो, दोनों तरफ देखके क्रॉस करनी चाहिए।’

‘ऊपर वाले ने पीछे की तरफ भी आंखें दी होतीं, तो मैं आगे-पीछे ही क्यों, दसो दिशाओं को देखके चलता’, तुम सोच रहे होगे। छटपटा रहे होगे। तुम्हें सहारा कोई नहीं देगा। सलाह सब दे रहे होंगे। तभी एक और उपदेशक कहेगा- ईश्वर का शुक्र मनाओ। खूब बचे। इस जगह पर पिछले एक माह में पांच एक्सीडेंट हो चुके। पांचों में हेड इंजरी। तुमको अपनी कुंडली बिचरवा के शनि का जाप करा लेना चाहिए। और एक तो सच्ची-मुच्ची का परोपकारी भीड़ को हटाता हुआ बोलेगा- ‘अरे आप उठिए। देखिए भी, कितनी चोट है। जाइए, अपनी मरहम-पट्टी करवाइए। इन परोपदेशकों के फेर में पड़ेंगे तो हड्डी-पसली तक सही-सलामत नहीं बचने वाली है।’

इन परोपदेशकों की शत खोपड़ियां और सहस्र आंखें होती हैं। परोपदेशक समकालीन परिदृश्य पर गहरी नजर रखते हैं। वे परोपदेश की स्थितियां तैयार करते हैं। दुर्घटनाओं से तो तब भी रक्षा संभव है। इनसे बच पाना नामुमकिन है।

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