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अब पानी में डाल रहे हैं आलू

मुद्रास्फीति की दर शून्य से कुछ ऊपर आई है। आम जनता को न तो यह पता है कि यदि यह दर शून्य से ऊपर चली जाए तो क्या होगा और यदि शून्य से नीचे आ जाए तो क्या होगा। ये टीवी और अखबारों में विश्लेषणों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण विषय होंगे। आम आदमी को तो इतना पता है कि जो आलू दस दिन पहले 20 रुपए किलो बिक रहा था, वह आज 30 रुपए किलो बिक रहा है। पहले आलू में पानी डालते थे और आज पानी में आलू डाल रहे हैं। आम आदमी अब सब्जी खरीदने में भी घबराने लगा है। सब्जी विक्रेताओं ने भी अच्छा ढर्रा अपना लिया है। वे किलो का भाव ही नहीं बताते। आम आदमी के साथ वाली सरकार जी कुछ तो रहम करो। बहुत हो गया। अब कब थामोगे हमारा हाथ?
इन्द्र सिंह धिगान, किंग्जवे कैम्प, दिल्ली

हमारी दिल्ली स्वच्छ दिल्ली
कामनवेल्थ गेम्स का समय नजदीक आ रहा है। सफाई के नाम पर दिल्ली में बह रहे सैकड़ों गंदे नालों की बदबू अतिथियों का स्वागत करने को तैयार है। खम्भों पर बैनर हेतु बांधी जाने वाली रस्सी के लाखों टुकड़े विदेशियों के स्वागत हेतु बेचैन हैं। सड़कों के गड्ढे हमारे शरीर की हड्डियों की परीक्षा तो लेते ही रहते हैं। बिजली की अस्त-व्यस्त तारें हमारी प्रगति की सूचक हैं। सभी विषयों पर समय रहते कुछ न कुछ सुधार किया जा सकता है। खम्भों की सफाई हेतु ठेका देने में सरकार को कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ सकता है, क्योंकि खम्भों पर लिपटी प्लास्टिक का मूल्य लाखों रुपए प्राप्त होगा। उम्मीद है खेलों तक हमारी दिल्ली आशानुकूल हो जाएगी।
रामकृष्ण, सेक्टर-6, द्वारका, नई दिल्ली

बिजली मीटर है या..
दिल्ली सरकार ने जब से बिजली विभाग को ठेकेदारों के हाथों में सौंपा है, तभी से जनता का जीना दुश्वार हो गया है। ठेकेदारों के वर्करों की टीम आती है और अच्छे भले मीटर, जिनमें कि कोई खराबी नहीं होती ठीक-ठाक चल रहे होते हैं, उन्हें जबरन बदल जाते हैं, क्योंकि उन्हें मीटर बदलने के पैसे मिले हैं। नए मीटर इतनी तेज भागने लगते हैं कि बिजली का बिल तुरंत दो ढाई गुना हो जाता है।
रोशन लाल बाली, महरौली, नई दिल्ली

शास्त्री परिवार की उपेक्षा
आज जहां देश के छोटे-मोटे नेताओं के पास आलीशान बंगला है, वहीं पर यह जानकर बहुत दुख हुआ कि पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के परिवार के पास एक भी सरकारी बंगला नहीं था। साथ ही यह सोच कर गर्व भी महसूस हुआ कि देश में कभी ऐसे नेता भी थे।  तब नेता शब्द एक सम्मानित शब्द हुआ करता था। शास्त्री जी ने हमारे देश के लिए क्या नहीं किया, क्या हमारी सरकार का यह फर्ज नहीं है कि वे शास्त्री जी के परिवार को एक अदद घर मुहैया करा सके, ताकि परिवार के लोग रह सकें।
मनीष चौधरी, लक्ष्मी नगर, नई दिल्ली

सतर्कता नहीं तो नुकसान
सरकार चाहे जो भी दावे कर रही है कि चीन ने घुसपैठ नहीं की और तरह-तरह के बहाने सरकार बना रही है, पर एक बात तो साफ है, सर्वविदित है कि चीन हमारी सीमाओं पर नजर टेढ़ी किए है। उसके इरादे अच्छे नहीं हैं। हमें सतर्क होना होगा नहीं तो 1962 के परिणाम याद रहने चाहिए, जब-जब हमने सतर्कता छोड़ी है हमें नुकसान हुआ है।
अशरफ यूसुफ, बिहारशरीफ, बिहार

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