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बाढ़ से दीवाली की मिठाई की मिठास हुई कम

दक्षिण भारत के राज्यों में बरपा बाढ़ का कहर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिवाली की मिठाई की मिठास कम कर गया। त्यौहार की बधाई में दिए जाने वाले डिब्बों में भी सूखे मेवे कम नजर आएंगे। सबसे बड़े इस त्यौहार पर बेहतर कारोबार की उम्मीद करने वाले व्यापारियों को करीब चार सौ करोड़ की चपत लगने की आशंका है। किचन की बात करें तो प्याज आसूं निकलवाने को तैयार है। बाढ़ के चलते बाढ़ प्रभावित राज्यों से प्याज और चीनी की आवक कम हो गई।

इससे कारोबारियों की चिंता बढ़ने लगी। दिवाली की मिठाई को मिठास कैसे बढ़ाई जाए? छोंक लगाकर सब्जी को कैसे स्वादिष्ट बनाया जाए व सलाद के थाल को कैसे सजाया जाए? ऐसी उधेड़बुन में लगे हुए हैं। दक्षिणी राज्यों में आई बाढ़ का असर औद्योगिक नगरी पर दिखाई देने लगा है। इन राज्यों से आने वाली खाद्य सामग्री की आवक रुकने वाली वस्तुओं की किल्लत के साथ इनके दाम भी आसमान छूने लगे हैं।

महाराष्ट्र से आने वाली प्याज और चीनी की कमी का असर अब दिखाई देने लगा है। मंडी में आने वाली करीब 15 सौ कुंतल प्याज की आवक घटकर अब मात्र 400 कुंतल रह गई है। अधिकतर प्याज नासिक से आती है। महाराष्ट्र से आने वाली प्याज की आवक बंद है। बीते सप्ताह जहां प्याज के थोक भाव एक हजार रुपये कुंतल थे। अब बढ़कर19 सौ रुपये कुंतल हो गए हैं।

चीनी की बाजार में पहले से किल्लत है। महाराष्ट्र से चीनी की आवक भी करीब एक हजार कुंतल की है, जो फिल्हाल बंद है। चीनी के खुले बाजार में भाव 32 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। शहर में दिवाली पर चीनी की मांग की करीब छह हजार टन पहुंच गई है। इसके अलावा, केरल, आंध्रप्रदेश  व कर्नाटक राज्यों से औद्योगिक इकाइयों के लिए कच्चा माल भी आता है। जिसमें रबड़ व कैमिकल शामिल है।

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