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दवा नियंत्रण विभाग राम भरोसे

दवा नियंत्रकों की कमी से जूझ रहे स्वास्थ्य विभाग में तबादलों के बाद अव्यवस्था का आलम है। सरकारी कामकाज तो प्रभावित हुआ ही दवा कारोबार से जुड़े माफिया को भी पर लग गए हैं। विभाग ने हाल ही में प्रदेश के दवा नियंत्रकों व वरिष्ठ दवा नियंत्रकों के तबादले किए हैं। लंबे समय से एक ही स्थान पर बैठे अधिकारियों की शिकायत मिलने पर उठाया गया यह कदम विभाग की सेहत के लिए अनुकूल साबित नहीं हो रहा।

प्रदेश में दवा नियंत्रकों की 24 पोस्ट हैं। इनमें  से 8 रिक्त हैं। दवा निरीक्षक से दवा नियंत्रक बनने के बाद विभाग ने चार पदों के लिए हाल ही में कर्मचारी चयन आयोग की मार्फत साक्षात्कार लिए थे। साक्षात्कार देने वालों का चयन अनुभव को लेकर विवाद में पड़ गया।

उनमें से एक उम्मीदवार की फरीदाबाद में तैनाती हो पाई है। रोहतक के वरिष्ठ दवा नियंत्रक को गुड़गांव भेज दिया गया तो रोहतक जोन को संभालने के लिए लालचंद मित्तल को लाया गया। ट्रांसफर के बाद मित्तल लंबी छुट्टी पर चले गए हैं जबकि जिला दवा नियंत्रक को सोनीपत भेज दिया है। रोहतक का अतिरिक्त कार्यभार पड़ोसी जिला के दवा नियंत्रक को देने की बजाय कैथल के अधिकारी को दिया गया है।

इतना ही नहीं रोहतक जोन के जिला झज्जर और जिला भिवानी के दवा नियंत्रकों की पोस्ट पर भी स्थाई अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई। यानी पूरा रोहतक जोन रामभरोसे है जबकि रोहतक दवा व्यापार के मामले में प्रदेश का अग्रिम क्षेत्र है। यहां पर पीजीआई के अलावा  करीब 500 केमिस्ट शॉप व तीन दवा की होलसेल मार्केट हैं।

अधिकारियों के नदारद रहने से नशीली दवा बेचने वालों की चांदी है। सैंपलिंग का कार्य भी ठप हो गया है। झज्जर का अतिरिक्त कार्यभार रेवाड़ी के अधिकारी को व भिवानी का कार्यभार नारनौल के अधिकारी को दिया  गया है। कुरुक्षेत्र व पंचकूला जिले के लिए भी स्थाई दवा नियंत्रक नहीं है।

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