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अरबी-फारसी विवि राज्य का 12वां विश्वविद्यालय होगा

अरबी-फारसी विश्वविद्यालय को बहुत जल्द राजकीय विश्वविद्यालय का दर्जा मिल जाएगा। इसे उप्र विश्वविद्यालय एक्ट-1973 के दायरे में लाया जा रहा है। ऐसा होने से विवि की स्थापना में आने वाली सभी दिक्कतें खत्म हो जाएंगी। एक्ट में शामिल होने के बाद यूपी में यह 12वां राजकीय विश्वविद्यालय होगा। 

रामपुर के जौहर अरबी-फारसी विवि के जवाब में राज्य सरकार अरबी-फारसी विश्वविद्यालय विधेयक लाई थी। उर्दू, अरबी और फारसी भाषाओं में शिक्षण व अनुसंधान के लिए यह विश्वविद्यालय लखनऊ में खोला जाना है। पहले यह विश्वविद्यालय अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधीन था लेकिन बाद में इसे उच्च शिक्षा विभाग के हवाले कर दिया गया।

इस विश्वविद्यालय के संचालन के लिए अलग कानून बनाया गया था। इससे कई तकनीकी दिक्कतें सामने आ गई। यही वजह है कि एलान के साल भर बाद भी उप्र अरबी-फारसी विवि अस्तित्व में नहीं आ सका। विश्वविद्यालय का हाल जौहर विवि जैसा न हो जाए इसलिए राज्य सरकार ने निर्णय किया है कि इस विवि को अन्य राजकीय विश्वविद्यालयों की तरह यूपी विवि एक्ट-1973 के अधीन कर दिया जाए।

फिलहाल गोरखपुर, जौनपुर, फैजाबाद, लखनऊ, कानपुर, झांसी, बरेली, आगरा और मेरठ में राजकीय विश्वविद्यालय हैं। काशी विद्यापीठ व सम्पूर्णानंद संस्कृत विवि नाम के दो अन्य राजकीय विश्वविद्यालय वाराणसी में हैं। इसी क्रम में अरबी-फारसी विवि 12वां विश्वविद्यालय होगा। लखनऊ में अब दो राजकीय विवि हो जाएंगे।   सूत्रों ने बताया कि न्याय विभाग ने भी इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। जल्द ही यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट के सामने रखा जाएगा।

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